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Alankrat Srivastava
ha
ha | हमें पूछो कठिन कितना किसी का दिल चुराना है
- Alankrat Srivastava
हमें
पूछो
कठिन
कितना
किसी
का
दिल
चुराना
है
उन्हें
क्या
है
उन्हें
तो
बस
ज़रा
का
मुस्कुराना
है
- Alankrat Srivastava
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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कहानी
भी
नहीं
है
दिल
में
कोई
सो
कुछ
भी
इन
दिनों
अच्छा
नहीं
है
मैं
अब
उकता
गया
हूँ
ज़िन्दगी
से
मेरा
जी
अब
कहीं
लगता
नहीं
है
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Ritesh Rajwada
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रात
यूँँ
दिल
में
तिरी
खोई
हुई
याद
आई
जैसे
वीराने
में
चुपके
से
बहार
आ
जाए
Faiz Ahmad Faiz
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मसअला
फिर
वही
बे-घर
हुए
लोगों
का
है
हम
सभी
दिल
से
निकाले
कहाँ
तक
जाएँगे
Neeraj Neer
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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मैं
जब
सो
जाऊँ
इन
आँखों
पे
अपने
होंट
रख
देना
यक़ीं
आ
जाएगा
पलकों
तले
भी
दिल
धड़कता
है
Bashir Badr
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दिल
में
न
हो
जुरअत
तो
मोहब्बत
नहीं
मिलती
ख़ैरात
में
इतनी
बड़ी
दौलत
नहीं
मिलती
Nida Fazli
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अगर
हमारे
ही
दिल
में
ठिकाना
चाहिए
था
तो
फिर
तुझे
ज़रा
पहले
बताना
चाहिए
था
Shakeel Jamali
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हम
को
दिल
से
भी
निकाला
गया
फिर
शहरस
भी
हम
को
पत्थर
से
भी
मारा
गया
फिर
ज़हरस
भी
Azm Shakri
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गले
मिलना
न
मिलना
तो
तेरी
मर्ज़ी
है
लेकिन
तेरे
चेहरे
से
लगता
है
तेरा
दिल
कर
रहा
है
Tehzeeb Hafi
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तुम्हारी
ही
मोहब्बत
ने
सिखाया
ये
हुनर
वरना
बहुत
जी
जान
से
पढ़
कर
फ़क़त
इंजीनियर
होते
Alankrat Srivastava
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हर
पल
ना
यूँँ
तुम
गिला
करो
हम
सेे
तुम
खिल
के
मिला
करो
Alankrat Srivastava
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याद
उसको
भी
मेरी
तड़पाएगी
देखना
वो
लौट
करके
आएगी
Alankrat Srivastava
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हफ़्त-क़ुल्ज़ुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
तेरे
कुमकुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
है
बहुत
चीज़ें
मगर
मुझको
तो
आदतन
तुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
गीत
जो
तुम
को
लुभाते
हैं
जी
उस
तरन्नुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
हैं
जिस
सहारे
मैं
ग़ज़ल
कहता
था
उस
तलातुम
पे
ग़ज़ल
कहनी
है
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Alankrat Srivastava
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अगर
तुम
कहो
हम
बदल
जाते
हैं
जी
हैं
पत्थर
मगर
हम
पिघल
जाते
हैं
जी
अमीरी
बुलंदी
की
चाहत
न
थी
सो
ग़रीबी-फ़क़ीरी
में
पल
जाते
हैं
जी
सभी
गीत
उन
पर
ना
थे
पर
हुआ
यूँँ
सभी
गीत
में
वो
तो
ढल
जाते
हैं
जी
ख़ता
मेरी
इस
में
नहीं
थोड़ी
सी
भी
सभी
को
भले
लोग
खल
जाते
हैं
जी
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Alankrat Srivastava
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