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Sahir Ludhianvi
rang aur nasl zaat aur mazhab jo bhi hai aadmi se kamtar hai
rang aur nasl zaat aur mazhab jo bhi hai aadmi se kamtar hai | रंग और नस्ल ज़ात और मज़हब जो भी है आदमी से कमतर है
- Sahir Ludhianvi
रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
- Sahir Ludhianvi
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तन्हा
होना,
गुमसुम
दिखना,
कुछ
ना
कहना...
ठीक
नहीं
अपने
ग़म
को
इतना
सहना,
इतना
सहना...
ठीक
नहीं
आओ
दिल
की
मिट्टी
में
कुछ
दिल
की
बातें
बो
दें
हम
बारिश
के
मौसम
में
गमले
ख़ाली
रहना...
ठीक
नहीं
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Dev Niranjan
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ज़ख़्म
उनके
लिए
मेहमान
हुआ
करते
हैं
मुफ़लिसी
जो
तेरे
दरबान
हुआ
करते
हैं
वो
अमीरों
के
लिए
आम
सी
बातें
होंगी
हम
ग़रीबों
के
जो
अरमान
हुआ
करते
हैं
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Mujtaba Shahroz
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मुझे
इक
बात
कहनी
थी
अगर
मुझ
को
इज़ाज़त
हो
तुम्हीं
मेरी
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
मुहब्बत
हो
Shadab Asghar
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तिरे
बग़ैर
भी
हम
जी
रहे
हैं
और
ख़ुश
हैं
ये
बात
कम
तो
नहीं
है
तुझे
जलाने
को
Imran Aami
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बात
ऐसी
भी
भला
आप
में
क्या
रक्खी
है
इक
दिवाने
ने
ज़मीं
सर
पे
उठा
रक्खी
है
इत्तिफ़ाक़न
कहीं
मिल
जाए
तो
कहना
उस
सेे
तेरे
शाइर
ने
बड़ी
धूम
मचा
रक्खी
है
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Ismail Raaz
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ज़रा
सा
झूठ
ही
कह
दो
मेरे
बिन
तुम
अधूरे
हो
तुम्हारा
क्या
बिगड़ता
है
ज़रा
सी
बात
कहने
में
Parveen Shakir
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न
उसने
हाथ
लगाया
न
उसने
बातें
कीं
पड़े
पड़े
यूँँ
ही
ख़ुद
में
ख़राब
हो
गए
हम
Abhishek shukla
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तुझे
न
आएँगी
मुफ़्लिस
की
मुश्किलात
समझ
मैं
छोटे
लोगों
के
घर
का
बड़ा
हूॅं
बात
समझ
Umair Najmi
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जिस
की
बातों
के
फ़साने
लिक्खे
उस
ने
तो
कुछ
न
कहा
था
शायद
Ada Jafarey
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यूँं
तो
हर
शाम
उमीदों
में
गुज़र
जाती
है
आज
कुछ
बात
है
जो
शाम
पे
रोना
आया
Shakeel Badayuni
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उन
के
रुख़्सार
पे
ढलके
हुए
आँसू
तौबा
मैंने
शबनम
को
भी
शोलों
पे
मचलते
देखा
Sahir Ludhianvi
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दुनिया
ने
तजरबात-ओ-हवादिस
की
शक्ल
में
जो
कुछ
मुझे
दिया
है
वो
लौटा
रहा
हूँ
मैं
Sahir Ludhianvi
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टैंक
आगे
बढ़ें
कि
पीछे
हटें
कोख
धरती
की
बाँझ
होती
है
Sahir Ludhianvi
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ये
ज़ुल्फ़
अगर
खुल
के
बिखर
जाए
तो
अच्छा
इस
रात
की
तक़दीर
सँवर
जाए
तो
अच्छा
जिस
तरह
से
थोड़ी
सी
तेरे
साथ
कटी
है
बाक़ी
भी
उसी
तरह
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
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Sahir Ludhianvi
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सर्द
झोंकों
से
भड़कते
हैं
बदन
में
शो'ले
जान
ले
लेगी
ये
बरसात
क़रीब
आ
जाओ
Sahir Ludhianvi
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