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Sahir Ludhianvi
sard jhonkon se bhadakte hain badan men sholay
sard jhonkon se bhadakte hain badan men sholay | सर्द झोंकों से भड़कते हैं बदन में शो'ले
- Sahir Ludhianvi
सर्द
झोंकों
से
भड़कते
हैं
बदन
में
शो'ले
जान
ले
लेगी
ये
बरसात
क़रीब
आ
जाओ
- Sahir Ludhianvi
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ख़ुश्बू
की
बरसात
नहीं
कर
पाते
हैं
हम
ख़ुद
ही
शुरुआत
नहीं
कर
पाते
हैं
जिस
लड़की
की
बातें
करते
हैं
सब
सेे
उस
लड़की
से
बात
नहीं
कर
पाते
हैं
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Gyan Prakash Akul
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धूप
में
कौन
किसे
याद
किया
करता
है
पर
तिरे
शहर
में
बरसात
तो
होती
होगी
Ameer Imam
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दूर
तक
छाए
थे
बादल
और
कहीं
साया
न
था
इस
तरह
बरसात
का
मौसम
कभी
आया
न
था
Qateel Shifai
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ज़ब्त
करो
गर
ग़म
के
बादल
छाए
हैं,
रक़्स
करो
के
बारिश
आने
वाली
है
Darpan
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बारिश
हो
जाने
के
बाद
भी
मिट्टी
गीली
रहती
है
मैं
तेरे
जाने
के
बाद
भी
तुझ
सेे
बातें
करता
हूँ
Siddharth Saaz
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तुझे
करनी
है
तो
मुसावात
कर
कि
बेहतर
हमारे
भी
हालात
कर
मिटा
दिल
में
बनते
ये
सहराओं
को
ख़ुदा
अपने
बन्दों
पे
बरसात
कर
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Siddharth Saaz
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उस
ने
बारिश
में
भी
खिड़की
खोल
के
देखा
नहीं
भीगने
वालों
को
कल
क्या
क्या
परेशानी
हुई
Jamal Ehsani
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दिन
में
मिल
लेते
कहीं
रात
ज़रूरी
थी
क्या?
बेनतीजा
ये
मुलाक़ात
ज़रूरी
थी
क्या
मुझ
सेे
कहते
तो
मैं
आँखों
में
बुला
लेता
तुम्हें
भीगने
के
लिए
बरसात
ज़रूरी
थी
क्या
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Abrar Kashif
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ऐ
आसमान
तेरी
इनायत
बजा
मगर
फ़स्लें
पकी
हुई
हों
तो
बारिश
फ़ुज़ूल
है
Shahid Zaki
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मैं
कि
काग़ज़
की
एक
कश्ती
हूँ
पहली
बारिश
ही
आख़िरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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तिरी
दुनिया
में
जीने
से
तो
बेहतर
है
कि
मर
जाएँ
वही
आँसू
वही
आहें
वही
ग़म
है
जिधर
जाएँ
कोई
तो
ऐसा
घर
होता
जहाँ
से
प्यार
मिल
जाता
वही
बेगाने
चेहरे
हैं
जहाँ
जाएँ
जिधर
जाएँ
अरे
ओ
आसमाँ
वाले
बता
इस
में
बुरा
क्या
है
ख़ुशी
के
चार
झोंके
गर
इधर
से
भी
गुज़र
जाएँ
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Sahir Ludhianvi
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देखा
है
ज़िन्दगी
को
कुछ
इतने
क़रीब
से
चेहरे
तमाम
लगने
लगे
हैं
अजीब
से
Sahir Ludhianvi
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रंग
और
नस्ल
ज़ात
और
मज़हब
जो
भी
है
आदमी
से
कमतर
है
इस
हक़ीक़त
को
तुम
भी
मेरी
तरह
मान
जाओ
तो
कोई
बात
बने
Sahir Ludhianvi
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मैं
जिसे
प्यार
का
अंदाज़
समझ
बैठा
हूँ
वो
तबस्सुम
वो
तकल्लुम
तिरी
आदत
ही
न
हो
Sahir Ludhianvi
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अभी
ज़िंदा
हूँ
लेकिन
सोचता
रहता
हूँ
ख़ल्वत
में
कि
अब
तक
किस
तमन्ना
के
सहारे
जी
लिया
मैंने
Sahir Ludhianvi
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