hijr men gham ki chadhaai hai ilaahi tauba | हिज्र में ग़म की चढ़ाई है इलाही तौबा

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
हिज्रमेंग़मकीचढ़ाईहैइलाहीतौबा
क्यानसीबेकीबुराईहैइलाहीतौबा
कितनेकानोंकेवोकच्चेहैंकिअल्लाहकीपनाह
क्यारक़ीबोंकीबनआईहैइलाहीतौबा
नालाहोआहहोफ़रियादहोयाज़ारीहो
यारतकसबकीरसाईहैइलाहीतौबा
होचुकाक़त्लजहाँतेग़भीउठनेकीनहीं
किसक़दरनर्मकलाईहैइलाहीतौबा
शैख़-साहिबभीनहींबचकेयहाँसेनिकले
किसक़दरउनकोपिलाईहैइलाहीतौबा
दिल-लगीआपसेकीख़ल्क़मेंबदनामहुए
नेक-नामीयेकमाईहैइलाहीतौबा
चाहकरतुमकोभलाऔरकोक्यूँँकरचाहूँ
वाहक्यादिलमेंसमाईहैइलाहीतौबा
लेगएछीनकेदिलमैलनहींचितवनपर
कितनीदीदामेंसफ़ाईहैइलाहीतौबा
बोसामाँगातोकहाशुक्र-ए-ख़ुदाअच्छाहूँ
बातक्याजल्दउड़ाईहैइलाहीतौबा
नहींमा'लूमकिकिसशख़्सकामुँहदेखाहै
आजफिरग़मकीचढ़ाईहैइलाहीतौबा
कूचा-ए-इश्क़कीसचपूछोतोहमने'परवीं'
किसक़दरख़ाकउड़ाईहैइलाहीतौबा
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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