mehfil men gair hi ko na har baar dekhna | महफ़िल में ग़ैर ही को न हर बार देखना

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
महफ़िलमेंग़ैरहीकोहरबारदेखना
मेरीतरफ़भीभूलकेसरकारदेखना
आग़ाज़-ए-सब्ज़ासेहैजोरुख़्सारपरग़ुबार
अगलेबरसइसेख़त-ए-गुलज़ारदेखना
जबसर्फ़-ए-गुफ़्तुगूहूँतोदेखेउन्हेंकोई
मंज़ूरहोजोअब्र-ए-गुहर-बारदेखना
मैंनेकहाकिहिज्रमेंकुछमश्ग़लानहीं
बोलेकिरातदिनदर-ओ-दीवारदेखना
कहताहूँजबमैंउनसेबनाव-सिंघारको
कहतेहैंकोईऔरतरहदारदेखना
मैंजानभीदरेग़करूँँतोगुनाहगार
मेरेसिवाऔरख़रीदारदेखना
वोमुझसेपूछतेहैंकिकुछऐबतोनहीं
रफ़्तारदेखनामिरीगुफ़्तारदेखना
शैख़-ए-ज़माँक़दीमरविशकेबुज़ुर्गहैं
कितनाबड़ाहैगुम्बद-ए-दस्तारदेखना
वोबारबारदेखतेहैंआइनेमेंमुँह
अल्लाहउनकारू-ए-पुर-अनवारदेखना
चलतेहैंकू-ए-यारमेंहैवक़्त-ए-इम्तिहाँ
हिम्मतहारनादिल-ए-बीमारदेखना
होशियारफूँकफूँककेरखनायहाँक़दम
'परवीं'ज़राज़मानेकीरफ़्तारदेखना
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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