jaata raha qalb se saari KHudaai ka ishqqaabil-e-taarif hai tere fidaai ka ishq | जाता रहा क़ल्ब से सारी ख़ुदाई का इश्क़

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
जातारहाक़ल्बसेसारीख़ुदाईकाइश्क़
क़ाबिल-ए-तारीफ़हैतेरेफ़िदाईकाइश्क़
कैसीमुसीबतहैयेगुलकोख़मोशीकाशौक़
बुलबुल-ए-बेताबकोहर्ज़ा-सराईकाइश्क़
पड़गईबकनेकीलतवर्नायहाँतकथा
वाइज़-ए-ना-फ़हमकोहर्ज़ा-सराईकाइश्क़
करताहूँजोबारबारबोसा-ए-रुख़कासवाल
हुस्नकेसदक़ेसेहैमुझकोगदाईकाइश्क़
तुमकोख़ुदानेदियासारीख़ुदाईकाहुस्न
मुझकोअताकरदियासारीख़ुदाईकाइश्क़
आशिक़माशूक़कीहाएनिभेकिसतरह
उनकोकुदूरतकाशौक़मुझकोसफ़ाईकाइश्क़
पूछले'परवीं'सेयाक़ैससेदरयाफ़्तकर
शहरमेंमशहूरहैतेरेफ़िदाईकाइश्क़
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy