meri izzat badh gaii ik paan men | मेरी इज़्ज़त बढ़ गई इक पान में

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
मेरीइज़्ज़तबढ़गईइकपानमें
फ़र्क़क्याआयातुम्हारीशानमें
उनकोदेखातोकहायूँँकानमें
क्यूँँख़ललडालामिरेईमानमें
आशिक़ीहैबहर-ए-नापैदा-कनार
कश्ती-ए-दिलगईतूफ़ानमें
हैयहीपहचानबालीउम्रकी
बालियाँवोदोफ़क़तहैंकानमें
तेरेसदक़ेकेलिएहाज़िरहैंसब
दुरसमुंदरमेंजवाहरकानमें
देकेदिलउसबुतकोअपनाकरलिया
इसतिजारतमेंनहींनुक़सानमें
क्यामय-ए-गुल-गूँसेरौनक़घटगई
रंगबल्किगयाईमानमें
उसबुत-ए-काफ़िरकोसज्दाकरलिया
इससेक्याआयाख़ललईमानमें
तुमपरीकाफ़ख़्रहोहूरोंकानाज़
काशहोतेफ़िरक़ा-ए-इंसानमें
उसकेरुख़्सारोंपेहैख़तकीनुमूद
हाशियायेहैनयाक़ुरआनमें
गेसू-ए-पेचाँतिरेरुख़्सारपर
सूरा-ए-वल्लैलहैक़ुरआनमें
आरिज़-ए-ताबाँपेहैख़तकीनुमूद
हब्शियोंकीफ़ौजयाईरानमें
कहदोपेशआयाकरेअच्छीतरह
चलजाएमुझमेंऔरदरबानमें
वोकरेंज़ुल्मऔरतुमलबपरलाओ
वर्नागुस्ताख़ीहैउनकीशानमें
सुनतेसुनतेवाइज़ोंसेहज्व-ए-मय
ज़ोफ़साकुछगयाईमानमें
यूँँकहूँगावूँकहूँगाथाख़याल
रू-ब-रूकुछभीआयाध्यानमें
उसकीक़ुदरतसेनहीं'परवीं'बईद
राईकोपर्बतबनादेआनमें
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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