bahut hi saaf-o-shaffaaf aa gaya taqdeer se kaaghaz | बहुत ही साफ़-ओ-शफ़्फ़ाफ़ आ गया तक़दीर से काग़ज़

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
बहुतहीसाफ़-ओ-शफ़्फ़ाफ़गयातक़दीरसेकाग़ज़
तुम्हारेवास्तेलायाहूँमैंकश्मीरसेकाग़ज़
हुआहैअबरू-ए-जानाँसेदिल-ए-बेताबसद-पारा
मुक़ाबिलहोनहींसकतादम-ए-शमशीरसेकाग़ज़
अगरलोहेकेगुम्बदमेंरखेंगेअक़रबाउनको
वहींपहुँचाएगा'आशिक़किसीतदबीरसेकाग़ज़
मिरीक़िस्मतलिखीजातीथीजिसदिनमैंअगरहोता
उड़ाहीलेतादस्त-ए-कातिब-ए-तक़दीरसेकाग़ज़
भलासादावरक़परलिखताक्यारंगीं-मिज़ाजोंको
मुनक़्क़शकरलियाथापहलेहीतक़दीरसेकाग़ज़
कुछउसख़ुशबूकीहदभीहैमोअत्तरहोगयाबिल्कुल
मिरेहाथोंमेंवस्फ़-ए-गेसू-ए-शबगीरसेकाग़ज़
अदूकाख़तहैयातावीज़हैजोयूँँहैसीनेपर
येक्यूँँरक्खागयाहैइज़्ज़त-ओ-तौक़ीरसेकाग़ज़
ख़त-ए-तक़्दीरसेबेहतरमैंसमझूँइसकोदुनियामें
तूलिखवालाएगरक़ासिदबुत-ए-बे-पीरसेकाग़ज़
बताज़ालिममिरेक़ासिदनेतेराक्याबिगाड़ाथा
जोलेकरफाड़डालादस्त-ए-बे-तक़्सीरसेकाग़ज़
मिरेहाथगया'परवीं'अदूकेनामकाख़तथा
गिराथारहमेंजोदस्त-ए-बुत-ए-बे-पीरसेकाग़ज़
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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