khilaaya partav-e-rukh'saar ne kya gul samundar men | खिलाया परतव-ए-रुख़्सार ने क्या गुल समुंदर में

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
खिलायापरतव-ए-रुख़्सारनेक्यागुलसमुंदरमें
हुबाबकरबनेहरसम्तसेबुलबुलसमुंदरमें
हमारेआह-ओ-नालासेज़मानाहैतह-ओ-बाला
कभीहैशोरसहरामेंकभीहैग़ुलसमुंदरमें
किसीदिनमुझकोलेडूबेगाहिज्र-ए-यारकासदमा
चराग़-ए-हस्ती-ए-मौहूमहोगागुलसमुंदरमें
छेड़ोमुझकोमैंग़व्वासहूँदरिया-ए-मअनीका
ढूँडोमुझकोमुसतग़रक़हूँमैंबिल्कुलसमुंदरमें
तुम्हेंदरिया-ए-ख़ूबीकहदियाग़र्क़-ए-नदामतहूँ
कहाँयेनाज़-ओ-ग़म्ज़ाआरिज़-ओ-काकुलसमुंदरमें
पड़ाथाअक्स-ए-रू-ए-नाज़नींअर्साहुआउसको
परअबतकतैरताफिरताहैशक्ल-ए-गुलसमुंदरमें
उठीमौज-ए-सबाजुम्बाँसेशाख़-ए-आशियाँपैहम
चलीजातीहैगोयाकश्ती-ए-बुलबुलसमुंदरमें
वोपाईंबाग़मेंफिरतेहैंमैंफ़िक्रोंमेंडूबाहूँ
तमाशाहैकिगुलगुलशनमेंहैबुलबुलसमुंदरमें
अभीतोसैरकोजानालब-ए-दरियावोसीखेहैं
अभीतोदेखिएखिलतेहैंक्याक्यागुलसमुंदरमें
ख़याल-ए-यारक्यूँँ-करगयातूफ़ान-ए-गिर्यामें
ख़ुदामालूमकिसशयकाबनायापुलसमुंदरमें
कभीगिर्याकातूफ़ाँहैकभीहैरतकासन्नाटा
कभीबिल्कुलहूँसहरामेंकभीबिल्कुलसमुंदरमें
वोज़ालिमआशिक़-आज़ारीकी'परवीं'मश्क़करताहै
दिखाकरबुलबुलोंकोडालताहैगुलसमुंदरमें
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy