jis tarah do-jahaan men KHuda ka nahin shareek | जिस तरह दो-जहाँ में ख़ुदा का नहीं शरीक

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
जिसतरहदो-जहाँमेंख़ुदाकानहींशरीक
तेरेजमालमेंनहींकोईहसींशरीक
मैंभीतिराफ़िदाईहूँमुझपेभीरहमखा
जबतकहैइसगुमानमेंकुछकुछयक़ींशरीक
उसकेसितमहीकमहैंजोऔरोंकानामलूँ
हैआसमाँशरीकइसमेंज़मींशरीक
रोज़-ए-जज़ाउम्मीदहैसबकोसज़ामिले
इक़दाम-ए-क़त्लमेंहैंमिरेसबहसींशरीक
बद्रतेरादावा-ए-यकताईसबग़लत
जुमलासिफ़ातमेंहैतिरेवोजबींशरीक
सचपूछिएतोजान-ए-जहाँमेरेक़त्लमें
तिरछीनज़रकेसाथहीचीन-ए-जबींशरीक
वाइज़तूबाग़-ए-हुस्नकीइकबारसैरकर
मुमकिनहैदिलकशीमेंहोख़ुल्द-ए-बरींशरीक
क्यावज्हतेरेज़ुल्म-ओ-सितममेंमज़ानहीं
दौर-ए-चर्ख़आजवोशायदनहींशरीक
भेजापयाम-ए-जल्सातोअंदाज़सेकहा
अर्साहुआकिहमनहींहोतेकहींशरीक
'परवीं'ग़लतहैउनकोसमझनाजुदाजुदा
हैंजिस्म-ओ-जाँकीतरहसेदुनिया-ओ-दींशरीक
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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