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Vikram Gaur Vairagi
ik kali ki palkon par sard dhoop thehri thii
ik kali ki palkon par sard dhoop thehri thii | इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी
- Vikram Gaur Vairagi
इक
कली
की
पलकों
पर
सर्द
धूप
ठहरी
थी
इश्क़
का
महीना
था
हुस्न
की
दुपहरी
थी
ख़्वाब
याद
आते
हैं
और
फिर
डराते
हैं
जागना
बताता
है
नींद
कितनी
गहरी
थी
- Vikram Gaur Vairagi
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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तेरी
यादों
की
धूप
आने
लगी
है
अभी
खुल
जाएगा
मौसम
हमारा
Subhan Asad
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किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
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हम
अपनी
धूप
में
बैठे
हैं
'मुश्ताक़'
हमारे
साथ
है
साया
हमारा
Ahmad Mushtaq
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कतराते
हैं
बल
खाते
हैं
घबराते
हैं
क्यूँँ
लोग
सर्दी
है
तो
पानी
में
उतर
क्यूँँ
नहीं
जाते
Mahboob Khizan
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हम
ख़ुश
हैं
हमें
धूप
विरासत
में
मिली
है
अजदाद
कहीं
पेड़
भी
कुछ
बो
गए
होते
Shahryar
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धूप
निकली
है
बारिशों
के
ब'अद
वो
अभी
रो
के
मुस्कुराए
हैं
Anjum Ludhianvi
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तुम
सेे
इक
दिन
कहीं
मिलेंगे
हम
ख़र्च
ख़ुद
को
तभी
करेंगे
हम
धूप
निकली
है
तेरी
बातों
की
आज
छत
पर
पड़े
रहेंगे
हम
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Swapnil Tiwari
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लबों
में
आ
के
क़ुल्फ़ी
हो
गए
अश'आर
सर्दी
में
ग़ज़ल
कहना
भी
अब
तो
हो
गया
दुश्वार
सर्दी
में
Sarfaraz Shahid
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तेरा
बंदा
चला
गया
मालिक
ये
तो
काफ़ी
बुरा
हुआ
मालिक
तूने
दुनिया
बता
के
भेजा
था
मैं
जहन्नम
में
आ
गया
मालिक
तेरे
जैसों
की
होती
थी
दुनिया
मेरे
जैसों
का
कौन
था
मालिक
किन
ग़मों
में
उलझ
गया
था
मैं
कह
रहा
था
कि
शुक्रिया
मालिक
सारे
नौकर
बहुत
परेशाँ
थे
ये
ख़बर
थी
कि
मर
गया
मालिक
हाँ
ये
सच
है
कि
मैं
तसव्वुर
हूँ
इस
तसव्वुर
का
दायरा
मालिक
तू
मेरा
दुख
नहीं
समझता
है
तू
भी
इंसान
हो
गया
मालिक
मैंने
बस
उसके
लब
ही
देखे
थे
हो
गया
था
बहुत
ख़फ़ा
मालिक
अब
तो
मैं
तेरे
काम
का
हूँ
बस
मुझ
में
अब
कुछ
नहीं
बचा
मालिक
मैंने
वीरान
कर
लिया
ख़ुद
को
मुझ
में
आबाद
हो
गया
मालिक
एक
ही
हैं
तेरे
मेरे
ग़म
भी
एक
ही
है
तेरा
मेरा
मालिक
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Vikram Gaur Vairagi
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क्या
करूँँ
जब
समझ
में
ही
आई
नहीं
ज़िंदगी
से
मेरी
कुछ
लड़ाई
नहीं
रंग
मनमानियाँ
कर
रहे
थे
बहुत
मैंने
तस्वीर
पूरी
बनाई
नहीं
जो
बताना
है
खुल
के
बता
मेरे
दोस्त
तू
मेरा
दोस्त
है
मेरा
भाई
नहीं
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Vikram Gaur Vairagi
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जब
भी
दीवाना
कोई
राह
भटक
जाता
है
सब
से
पहले
तो
मेरा
आप
पे
शक
जाता
है
Vikram Gaur Vairagi
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मौत
वो
है
जो
आए
सजदे
में
ज़िन्दगी
वो
जो
बंदगी
हो
जाए
क्या
कहूँ
आप
कितने
प्यारे
हैं
इतने
प्यारे
कि
प्यार
ही
हो
जाए
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Vikram Gaur Vairagi
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इक
अव्वल
दर्जे
का
पाक
इक
माहिर
है
मन
तो
तुझ
में
रमता
है
दिल
काफ़िर
फिर
है
अपनी
सोचो
क़त्ल
तुम्हें
करना
भी
है
बन्दे
का
तो
क्या
है
बन्दा
हाज़िर
है
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Vikram Gaur Vairagi
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