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Vikram Gaur Vairagi
jab bhi deewaana koi raah bhatk jaata hai
jab bhi deewaana koi raah bhatk jaata hai | जब भी दीवाना कोई राह भटक जाता है
- Vikram Gaur Vairagi
जब
भी
दीवाना
कोई
राह
भटक
जाता
है
सब
से
पहले
तो
मेरा
आप
पे
शक
जाता
है
- Vikram Gaur Vairagi
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कोई
काँटा
कोई
पत्थर
नहीं
है
तो
फिर
तू
सीधे
रस्ते
पर
नहीं
है
मैं
इस
दुनिया
के
अंदर
रह
रहा
हूँ
मगर
दुनिया
मेरे
अंदर
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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शहर
गुम-सुम
रास्ते
सुनसान
घर
ख़ामोश
हैं
क्या
बला
उतरी
है
क्यूँँ
दीवार-ओ-दर
ख़ामोश
हैं
Azhar Naqvi
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सफ़र
में
मुश्किलें
आएँ
तो
जुरअत
और
बढ़ती
है
कोई
जब
रास्ता
रोके
तो
हिम्मत
और
बढ़ती
है
Nawaz Deobandi
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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रास्ता
सोचते
रहने
से
किधर
बनता
है
सर
में
सौदा
हो
तो
दीवार
में
दर
बनता
है
Jaleel 'Aali'
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उसूली
तौर
पे
मर
जाना
चाहिए
था
मगर
मुझे
सुकून
मिला
है
तुझे
जुदा
कर
के
Ali Zaryoun
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हम
भी
दरिया
हैं
हमें
अपना
हुनर
मालूम
है
जिस
तरफ़
भी
चल
पड़ेंगे
रास्ता
हो
जाएगा
Bashir Badr
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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मंज़िल
मिली
तो
उसकी
कमी
हमको
खा
गई
सामान
रास्ते
में
जो
खोना
पड़ा
हमें
Abbas Qamar
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मेरी
दुनिया
उजड़
गई
इस
में
तुम
इसे
हादसा
समझते
हो
आख़िरी
रास्ता
तो
बाक़ी
है
आख़िरी
रास्ता
समझते
हो
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Himanshi babra KATIB
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जो
तस्वीरें
साथ
में
खींची
जाती
हैं
वो
इक
दिन
तन्हा
महसूस
कराती
हैं
Vikram Gaur Vairagi
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यूँँ
बे-तरतीब
ज़ख़्मों
ने
बताया
राज़
क़ातिल
का
सलीके
से
जो
मेरा
क़त्ल
गर
होता
तो
क्या
होता
Vikram Gaur Vairagi
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हम
हैं
ना!
ये
जो
मुझ
सेे
कहते
हैं
ख़ुद
किसी
और
के
भरोसे
हैं
ज़िंदगी
के
लिए
बताओ
कुछ
ख़ुद-कुशी
के
तो
सौ
तरीक़े
हैं
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Vikram Gaur Vairagi
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सच
देखा
है
सच
क्या
है
सिर्फ़
नज़र
का
धोखा
है
खेल
तो
सारा
उसका
है
जिसने
पासा
फेंका
है
पीछे
चलने
वाले
ने
कुछ
आगे
का
सोचा
है
झूठ
ही
आख़िर
सच
निकले
ये
भी
तो
हो
सकता
है
तन्हा
क्यूँँ
रहते
हैं
आप
इतना
क्या
मन
लगता
है
तुमको
मोहब्बत
आती
थी
लड़ना
तुमने
सीखा
है
रौशनी
करनी
पड़ती
है
और
अँधेरा
होता
है
सब
कुछ
छोड़
रहे
हो
तुम
वैरागी
ये
सब
क्या
है
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Vikram Gaur Vairagi
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मुझ
में
कमियाँ
निकालने
वालों
और
कुछ
होगा
भी
नहीं
तुम
सेे
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Vikram Gaur Vairagi
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