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Khurram Afaq
davaa se hal na hua to dua pe chhod diya
davaa se hal na hua to dua pe chhod diya | दवा से हल न हुआ तो दु'आ पे छोड़ दिया
- Khurram Afaq
दवा
से
हल
न
हुआ
तो
दु'आ
पे
छोड़
दिया
तिरा
मोआ'मला
हम
ने
ख़ुदा
पे
छोड़
दिया
- Khurram Afaq
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हमेशा
साथ
सबके
तो
ख़ुदा
भी
रह
नहीं
सकता
बनाकर
औरतें
उसने
ज़मीं
को
यूँँ
किया
जन्नत
Anukriti 'Tabassum'
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तुम
भी
वैसे
थे
मगर
तुम
को
ख़ुदा
रहने
दिया
इस
तरह
तुम
को
ज़माने
से
जुदा
रहने
दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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आसमाँ
में
है
ख़ुदा,
क्या
सब
दुआएंँ
आसमाँ
तक
जा
रही
हैं
मेरी
इक
फ़रयाद
पूरी
हो
तो
मैं
मानूँ
वहाँ
तक
जा
रही
हैं
Saahir
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ख़ुदा
ऐसे
एहसास
का
नाम
है
रहे
सामने
और
दिखाई
न
दे
Bashir Badr
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ख़ुदा
की
शा'इरी
होती
है
औरत
जिसे
पैरों
तले
रौंदा
गया
है
तुम्हें
दिल
के
चले
जाने
पे
क्या
ग़म
तुम्हारा
कौन
सा
अपना
गया
है
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Ali Zaryoun
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कश्तियाँ
सब
की
किनारे
पे
पहुँच
जाती
हैं
नाख़ुदा
जिन
का
नहीं
उन
का
ख़ुदा
होता
है
Ameer Minai
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ज़िंदगी
अपनी
जब
इस
शक्ल
से
गुज़री
'ग़ालिब'
हम
भी
क्या
याद
करेंगे
कि
ख़ुदा
रखते
थे
Mirza Ghalib
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तोड़
कर
तुझको
भला
मेरा
भी
क्या
बन
जाता
उल्टा
मैं
ख़ुद
की
मुहब्बत
प
सज़ा
बन
जाता
जितनी
कोशिश
है
तिरी
एक
तवज्जोह
के
लिए
उस
सेे
कम
में
तो
मैं
दुनिया
का
ख़ुदा
बन
जाता
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Ashutosh Vdyarthi
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गुनाहगार
को
इतना
पता
तो
होता
है
जहाँ
कोई
नहीं
होता
ख़ुदा
तो
होता
है
Waseem Barelvi
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किया
तबाह
तो
दिल्ली
ने
भी
बहुत
'बिस्मिल'
मगर
ख़ुदा
की
क़सम
लखनऊ
ने
लूट
लिया
Bismil Saeedi
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यूँँ
न
कर
वस्ल
के
लम्हों
को
हवस
से
ता'बीर
चंद
पत्ते
ही
तो
तोड़े
हैं
शजर
से
मैं
ने
Khurram Afaq
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बड़ी
मुश्किल
से
नीचे
बैठते
हैं
जो
तेरे
साथ
उठते
बैठते
हैं
अकेले
बैठना
होगा
किसी
को
अगर
हम
तुम
इकट्ठे
बैठते
हैं
और
अब
उठना
पड़ा
ना
अगली
सफ़
से
कहा
भी
था
कि
पीछे
बैठते
हैं
यहीं
पर
सिलसिला
मौक़ूफ़
कर
दो
ज़ियादा
तजरबे
ले
बैठते
हैं
निगाहें
क्यूँँ
न
ठहरें
उस
पे
'आफ़ाक़'
शजर
पर
ही
परिंदे
बैठते
हैं
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Khurram Afaq
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पहले
ये
रब्त
मेरी
ज़रूरत
बनाओगे
और
फिर
कहोगे
राब्ता
मुमकिन
नहीं
रहा
Khurram Afaq
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बड़ी
मुश्किल
से
नीचे
बैठते
हैं
जो
तेरे
साथ
उठते
बैठते
हैं
Khurram Afaq
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हम
तो
समझे
थे
मोहब्बत
की
लड़ाई
साहब
आप
तलवार
उठा
लाए
हैं
भाई
साहब
धूप
तालाब
का
हुलिया
तो
बदल
सकती
है
इतनी
आसानी
से
छुटती
नहीं
काई
साहब
ख़ाक
को
ख़ाक
पे
धरने
का
मज़ा
अपना
है
हिज्र
में
कौन
बिछाता
है
चटाई
साहब
फिर
भी
आवारगी
ज़ाएअ
नहीं
जाने
वाली
कोई
भी
चीज़
अगर
हाथ
न
आई
साहब
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Khurram Afaq
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