KHuda ke fazl se ham haq pe hain baatil se kya nisbat | ख़ुदा के फ़ज़्ल से हम हक़ पे हैं बातिल से क्या निस्बत

  - Parveen Umm-e-Mushtaq
ख़ुदाकेफ़ज़्लसेहमहक़पेहैंबातिलसेक्यानिस्बत
हमेंतुमसेत'अल्लुक़हैमह-ए-कामिलसेक्यानिस्बत
मह-ए-कनआँकोमेरेइसमह-ए-कामिलसेक्यानिस्बत
ज़ुलेख़ाकेमुलव्विसदिलकोमेरेदिलसेक्यानिस्बत
हमाकारमज़ि-ख़ुद-कामीब-बदनामीकशीदआख़िर
कभीमैंनेसोचाराज़कोमहफ़िलसेक्यानिस्बत
कहेजाताहैजोवाइज़सुनेजातेहैंहमलेकिन
जोअहल-ए-दिलनहींउसकोहमारेदिलसेक्यानिस्बत
मुझेहैसदमा-ए-हिज्राँअदूकोसैकड़ोंख़ुशियाँ
मिरेउजड़ेहुएघरकोभरीमहफ़िलसेक्यानिस्बत
ख़ुदाहीफिरभरोसाहैख़ुदाहैनाख़ुदामेरा
वगर्नामैंभँवरमेंहूँमुझेसाहिलसेक्यानिस्बत
फ़िराक़-ए-यारमेंमेरादिल-ए-मुज़्तरठहरेगा
तुम्हींसोचोसुकूँकोताइर-ए-बिस्मिलसेक्यानिस्बत
कनीज़-ए-हज़रत-ए-मुश्किल-कुशाहूँदिलसेमैं'परवीं'
त'अल्लुक़मुझकोआसानीसेहैमुश्किलसेक्यानिस्बत
  - Parveen Umm-e-Mushtaq
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