aise bhi kuchh lamhe yaaro aayenge | ऐसे भी कुछ लम्हे यारो आएँगे

  - P P Srivastava Rind
ऐसेभीकुछलम्हेयारोआएँगे
हममश्कूकनज़रसेदेखेजाएँगे
नींद-भरीआँखेंभीधोकादेतीहैं
जागोगेतोख़्वाबकहाँसेआएँगे
उनसेपर्दा-दारीघरमेंमुश्किलहै
फ़ुर्सतकेलम्हेहैंआएँजाएँगे
धूलहुआजाताहैमंज़ररातोंका
ख़्वाबोंकामेआरकहाँसेलाएँगे
सन्नाटाआवाराफिरताहैघरमें
हमउसकोअबकामदिलाकरजाएँगे
मंदिरमस्जिदगुरुद्वारेसबशश्दरहैं
अबरस्तेकेपत्थरपूजेजाएँगे
धूपमेंबैठेसेंकरहेहोअपनाबदन
येभीमंज़रअबउर्यांकहलाएँगे
सूरजछतसेउतरगयातोक्याग़महै
अँधियारेमें'रिंद'कहींसोजाएँगे
  - P P Srivastava Rind
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