nashaat-e-dard ke mausam men gar nami kam hai | नशात-ए-दर्द के मौसम में गर नमी कम है

  - P P Srivastava Rind
नशात-ए-दर्दकेमौसममेंगरनमीकमहै
फ़ज़ाकेबर्ग-ए-शफ़क़परभीताज़गीकमहै
सराबबनकेख़लाओंमेंगुमनज़ारा-ए-सम्त
मुझेलगाकिख़लाओंमेंरौशनीकमहै
अजीबलोगहैंकाँटोंपेफूलरखतेहैं
येजानतेहुएइनमेंमुक़द्दरीकमहै
कोईख़्वाबयादोंकाबे-कराँसाहुजूम
उदासरातकेख़े
मेंमेंदिलकशीकमहै
मैंअपने-आपमेंबिखराहुआहूँमुद्दतसे
अगरमैंख़ुदकोसमेटूँतोज़िंदगीकमहै
खुलीछतोंपेदुपट्टेहवामेंउड़तेनहीं
तुम्हारेशहरमेंक्याआसमानभीकमहै
पुरानीसोचकोसमझेंतोकोईबातबने
जदीदफ़िक्रमेंएहसास-ए-नग़्मगीकमहै
कहाँसेलाओगे'रिंद'मो'तबरमज़मून
ग़ज़लमेंजबकिरिवायतकीचाशनीकमहै
  - P P Srivastava Rind
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