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Saarthi Baidyanath
andhere ko samajhna hai andheron ki pareshaani
andhere ko samajhna hai andheron ki pareshaani | अँधेरे को समझना है अँधेरों की परेशानी
- Saarthi Baidyanath
अँधेरे
को
समझना
है
अँधेरों
की
परेशानी
कोई
सूरज
अँधेरों
की
परेशानी
न
समझेगा
- Saarthi Baidyanath
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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वो
जिसपर
उसकी
रहमत
हो
वो
दौलत
मांगता
है
क्या
मोहब्बत
करने
वाला
दिल
मोहब्बत
मांगते
है
क्या
तुम्हारा
दिल
कहे
जब
भी
उजाला
बन
के
आ
जाना
कभी
उगता
हुआ
सूरज
इज़ाज़त
मांगता
है
क्या
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Ankita Singh
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उरूज
पर
है
अज़ीज़ो
फ़साद
का
सूरज
जभी
तो
सूखती
जाती
हैं
प्यार
की
झीलें
Nami Nadri
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ये
लाल
शा
में
ये
लाल
अंबर
ये
लाल
सूरज
चमक
रहा
है
मुझे
बता
दो
कहाँ
है
खोई
तिरे
लबों
की
ये
सुर्ख़
लाली
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Anmol Mishra
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सियाह
रात
नहीं
लेती
नाम
ढलने
का
यही
तो
वक़्त
है
सूरज
तिरे
निकलने
का
Shahryar
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अभी
चाहिए
और
कितनी
बुलन्दी
कि
सहमा
है
सूरज
इमारत
के
पीछे
Kanha Mohit
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पुराने
साल
की
ठिठुरी
हुई
परछाइयाँ
सिमटीं
नए
दिन
का
नया
सूरज
उफ़ुक़
पर
उठता
आता
है
Ali Sardar Jafri
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रात
भर
ता'रीफ़
मैंने
की
तुम्हारे
रूप
की
चाँद
इतना
जल
गया
सुनकर
कि
सूरज
हो
गया
Chandan Rai
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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इसी
फ़कीर
की
गफ़लत
से
आगही
ली
है
मेरे
चराग़
से
सूरज
ने
रौशनी
ली
है
गली-गली
में
भटकता
है
शोर
करता
हुआ
हमारे
इश्क़
ने
सस्ती
शराब
पी
ली
है
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Ammar Iqbal
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मौत
जब
तक
मुझे
न
आएगी
मेरी
ज़िंदादिली
न
जाएगी
Saarthi Baidyanath
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ग़ज़ल
का
आख़री
जो
शे'र
था
वो
था
बहुत
अच्छा
मगर
तुमने
कहाँ
पूरी
ग़ज़ल
पढ़ने
की
ज़हमत
की
Saarthi Baidyanath
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मुक़द्दर
परेशां
निग़ाहें
मिलाकर
सभी
रो
रहे
हैं
मुझे
आज़माकर
यही
आरज़ू
बस
यही
है
तमन्ना
दिलों
में
रहूँ
मैं
ग़ज़ल
गुनगुनाकर
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Saarthi Baidyanath
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'मीर'
का
शे'र
याद
रखने
से
कोई
शायर
तो
नहीं
हो
जाता
Saarthi Baidyanath
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ये
माना
आप
से
बेहतर
नहीं
हूँ
मगर
मैं
खेल
से
बाहर
नहीं
हूँ
Saarthi Baidyanath
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