sargoshtagi men aalam-e-hasti se yaas hai | सर-गश्तगी में आलम-ए-हस्ती से यास है

  - Mirza Ghalib
सर-गश्तगीमेंआलम-ए-हस्तीसेयासहै
तस्कींकोदेनवेदकिमरनेकीआसहै
लेतानहींमिरेदिल-ए-आवाराकीख़बर
अबतकवोजानताहैकिमेरेहीपासहै
कीजिएबयाँसुरूर-ए-तप-ए-ग़मकहाँतलक
हरमूमिरेबदनपेज़बान-ए-सिपासहै
हैवोग़ुरूर-ए-हुस्नसेबेगाना-ए-वफ़ा
हर-चंदउसकेपासदिल-ए-हक़-शनासहै
पीजिसक़दरमिलेशब-ए-महताबमेंशराब
इसबलग़मी-मिज़ाजकोगर्मीहीरासहै
हरइकमकानकोहैमकींसेशरफ़'असद'
मजनूँजोमरगयाहैतोजंगलउदासहै
क्याग़महैउसकोजिसका'अली'साइमामहो
इतनाभीफ़लक-ज़दाक्यूँँबद-हवासेहै
  - Mirza Ghalib
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