rashk kahtaa hai ki us ka gair se ikhlaas haif | रश्क कहता है कि उस का ग़ैर से इख़्लास हैफ़

  - Mirza Ghalib
रश्ककहताहैकिउसकाग़ैरसेइख़्लासहैफ़
अक़्लकहतीहैकिवोबे-मेहरकिसकाआश्ना
ज़र्राज़र्रासाग़र-ए-मै-ख़ाना-ए-नै-रंगहै
गर्दिश-ए-मजनूँब-चश्मक-हा-ए-लैलाआश्ना
शौक़हैसामाँ-तराज़-ए-नाज़िश-ए-अरबाब-ए-अज्ज़
ज़र्रासहरा-दस्त-गाहक़तरादरिया-आश्ना
मैंऔरएकआफ़तकाटुकड़ावोदिल-ए-वहशीकिहै
आफ़ियतकादुश्मनऔरआवारगीकाआश्ना
शिकवा-संज-ए-रश्क-ए-हम-दीगररहनाचाहिए
मेराज़ानूमोनिसऔरआईनातेराआश्ना
कोहकननक़्क़ाश-ए-यक-तिम्साल-ए-शीरींथा'असद'
संगसेसरमारकरहोवेपैदाआश्ना
ख़ुद-परस्तीसेरहेबाहम-दिगरना-आश्ना
बेकसीमेरीशरीकआईनातेराआश्ना
आतिश-ए-मू-ए-दिमाग़-ए-शौक़हैतेरातपाक
वर्नाहमकिसकेहैंदाग़-ए-तमन्नाआश्ना
जौहर-ए-आईनाजुज़रम्ज़-ए-सर-ए-मिज़गाँनहीं
आश्नाकीहम-दिगरसमझेहैईमाआश्ना
रब्त-ए-यक-शीराज़ा-ए-वहशतहैंअजज़ा-ए-बहार
सब्ज़ाबेगानासबाआवारागुलना-आश्ना
बे-दिमाग़ीशिकवा-संज-ए-रश्क-ए-हम-दीगरनहीं
यारतेराजाम-ए-मयख़म्याज़ामेराआश्ना
  - Mirza Ghalib
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