bala se hain jo ye peshe-e-nazar dar-o-deewar | बला से हैं जो ये पेश-ए-नज़र दर-ओ-दीवार

  - Mirza Ghalib
बलासेहैंजोयेपेश-ए-नज़रदर-ओ-दीवार
निगाह-ए-शौक़कोहैंबाल-ओ-परदर-ओ-दीवार
वुफ़ूर-ए-अश्कनेकाशानेकाकियायेरंग
किहोगएमिरेदीवार-ओ-दरदर-ओ-दीवार
नहींहैसायाकिसुनकरनवेद-ए-मक़दम-ए-यार
गएहैंचंदक़दमपेश-तरदर-ओ-दीवार
हुईहैकिसक़दरअर्ज़ानी-ए-मय-ए-जल्वा
किमस्तहैतिरेकूचेमेंहरदर-ओ-दीवार
जोहैतुझेसर-ए-सौदा-ए-इन्तिज़ारतो
किहैंदुकान-ए-मता-ए-नज़रदर-ओ-दीवार
हुजूम-ए-गिर्याकासामानकबकियामैंने
किगिरपड़ेमिरेपाँवपरदर-ओ-दीवार
वोरहामिरेहम-साएमेंतोसाएसे
हुएफ़िदादर-ओ-दीवारपरदर-ओ-दीवार
नज़रमेंखटकेहैबिनतेरेघरकीआबादी
हमेशारोतेहैंहमदेखकरदर-ओ-दीवार
पूछबे-ख़ुदी-ए-ऐश-ए-मक़दम-ए-सैलाब
किनाचतेहैंपड़ेसर-ब-सरदर-ओ-दीवार
कहकिसीसेकि'ग़ालिब'नहींज़मानेमें
हरीफ़-ए-राज़-ए-मोहब्बतमगरदर-ओ-दीवार
  - Mirza Ghalib
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