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Armaan khan
haan yahii meri khud-shanasi hai
haan yahii meri khud-shanasi hai | हाँ यही मेरी ख़ुद-शनासी है
- Armaan khan
हाँ
यही
मेरी
ख़ुद-शनासी
है
जिस्म
ताज़ा
है
रूह
बासी
है
सब
हँसी
को
हँसी
समझते
हैं
तुम
तो
समझो
हँसी
उदासी
है
- Armaan khan
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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यहाँ
वो
कौन
है
जो
इंतिख़ाब-ए-ग़म
पे
क़ादिर
हो
जो
मिल
जाए
वही
ग़म
दोस्तों
का
मुद्दआ'
होगा
Jaun Elia
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पत्थर
के
जिगर
वालो
ग़म
में
वो
रवानी
है
ख़ुद
राह
बना
लेगा
बहता
हुआ
पानी
है
Bashir Badr
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तेरे
जाने
से
ज़्यादा
हैं
न
कम
पहले
थे
हम
को
लाहक़
हैं
वही
अब
भी
जो
ग़म
पहले
थे
Afzal Khan
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गर
उदासी,
चिड़चिड़ापन,
जान
देना
प्यार
है
माफ़
करना,
काम
मुझको
और
भी
हैं
दोस्तो
Divy Kamaldhwaj
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ग़म-ए-दुनिया
भी
ग़म-ए-यार
में
शामिल
कर
लो
नश्शा
बढ़ता
है
शराबें
जो
शराबों
में
मिलें
Ahmad Faraz
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कुल
जोड़
घटाकर
जो
ये
संसार
का
दुख
है
उतना
तो
मिरे
इक
दिल-ए-बेज़ार
का
दुख
है
शाइर
हैं
तो
दुनिया
से
अलग
थोड़ी
हैं
लोगों
सबकी
ही
तरह
हमपे
भी
घर
बार
का
दुख
है
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Ashutosh Vdyarthi
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खुशियाँ
उसी
के
साथ
हैं
जो
ग़म
गुसार
है
ऐसे
हरेक
शख़्स
ही
दुनिया
का
यार
है
Sunny Seher
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हमारे
सैकड़ों
दुख
थे,
और
उस
में
एक
दुख
ये
भी
जो
हम
से
हो
के
गुज़रे
थे,
हमें
दीवार
कहते
थे
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Siddharth Saaz
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शिकस्ता
दिल
शब-ए-ग़म
दर्द
रुसवाई
अरे
इतना
तो
चलता
है
मुहब्बत
में
Sapna Moolchandani
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भटकती
रूहों
का
बोझ
कब
तक
कोई
उठाता
कहीं
ठहरता,पनाह
लेता,
तो
साथ
होता
मैं
जिस
'अक़ीदत
के
साथ
उसको
भुला
रहा
हूँ
उसी
'अक़ीदत
से
चाह
लेता,
तो
साथ
होता
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Armaan khan
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तुम्हारा
ज़िक्र
चला
है
हमारे
घर
में
फिर
हम
एक
कोने
में
बैठे
हैं
मुस्कुरा
रहे
हैं
Armaan khan
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हुस्न
का
इम्कान
समझा
देर
से
मैं
नफ़ा-नुक़्सान
समझा
देर
से
उसके
'आशिक़
उसके
बारे
में
मेरा
भर
रहे
थे
कान,समझा
देर
से
मुझको
पहले
दिन
से
उस
सेे
इश्क़
था
और
वो
नादान
समझा
देर
से
जो
समझना
ज़िन्दगी
की
शर्त
थी
उसको
ही
इंसान
समझा
देर
से
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Armaan khan
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मैं
इक
ख़याल
की
दुनिया
का
शाहज़ादा
हूँ
मेरे
ख़याल
की
क्यारी
का
फूल
थी
तुम
भी
मैं
एक
बार
मोहब्बत
में
फिर
शिकस्ता
रहा
सो
बेबसी
में
ये
कहता
हूँ
भूल
थी
तुम
भी
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Armaan khan
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जिस-जिसकी
ज़बाँ
बोल
रही
प्यार,
मरेंगे
मैं
लिखता
हूँ
ले
जाओ,
मेरे
यार
मरेंगे
मेरी
तो
मोहब्बत
में
फ़क़त
हार
हुई
है
उस
लड़की
पे
तुम
देखना
दो
चार
मरेंगे
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Armaan khan
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