dekhna qismat ki aap apne pe rashk aa jaa.e hai | देखना क़िस्मत कि आप अपने पे रश्क आ जाए है

  - Mirza Ghalib
देखनाक़िस्मतकिआपअपनेपेरश्कजाएहै
मैंउसेदेखूँभलाकबमुझसेदेखाजाएहै
हाथधोदिलसेयहीगर्मीगरअंदेशेमेंहै
आबगीनातुन्दि-ए-सहबासपिघलाजाएहै
ग़ैरकोयारबवोक्यूँँकरमन-ए-गुस्ताख़ीकरे
गरहयाभीउसकोआतीहैतोशरमाजाएहै
शौक़कोयेलतकिहरदमनालाखींचेजाइए
दिलकीवोहालतकिदमलेनेसेघबराजाएहै
दूरचश्म-ए-बदतिरीबज़्म-ए-तरबसेवाहवाह
नग़्माहोजाताहैवाँगरनालामेराजाएहै
गरचेहैतर्ज़-ए-तग़ाफ़ुलपर्दा-दार-ए-राज़-ए-इश्क़
परहमऐसेखोएजातेहैंकिवोपाजाएहै
उसकीबज़्म-आराइयाँसुनकरदिल-ए-रंजूरयाँ
मिस्ल-ए-नक़्श-ए-मुद्दआ-ए-ग़ैरबैठाजाएहै
होके'आशिक़वोपरी-रुख़औरनाज़ुकबनगया
रंगखुलताजाएहैजितनाकिउड़ताजाएहै
नक़्शकोउसकेमुसव्विरपरभीक्याक्यानाज़हैं
खींचताहैजिसक़दरउतनाहीखिंचताजाएहै
सायामेरामुझसेमिस्ल-ए-दूदभागेहै'असद'
पासमुझआतिश-ब-जाँकेकिससेठहराजाएहै
  - Mirza Ghalib
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