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Vikram Gaur Vairagi
varna to bewafaai kise kab muaaf hai
varna to bewafaai kise kab muaaf hai | वरना तो बेवफ़ाई किसे कब मुआ'फ़ है
- Vikram Gaur Vairagi
वरना
तो
बेवफ़ाई
किसे
कब
मुआ'फ़
है
तू
मेरी
जान
है
सो
तुझे
सब
मुआ'फ़
है
क्यूँ
पूछती
हो
मैंने
तुम्हें
माफ़
कर
दिया
ख़ामोश
हो
गया
हूँ
मैं
मतलब
मुआ'फ़
है
- Vikram Gaur Vairagi
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गुज़रने
ही
न
दी
वो
रात
मैं
ने
घड़ी
पर
रख
दिया
था
हाथ
मैं
ने
Shahzad Ahmad
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तमाम
बातें
जो
चाहता
था
मैं
तुम
सेे
कहना
वो
एक
काग़ज़
पे
लिख
के
काग़ज़
जला
दिया
है
Dipendra Singh 'Raaz'
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ज़िन्दगी
छीन
ले
बख़्शी
हुई
दौलत
अपनी
तूने
ख़्वाबों
के
सिवा
मुझ
को
दिया
भी
क्या
है
Akhtar Saeed Khan
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मैं
ने
उस
की
तरफ़
से
ख़त
लिक्खा
और
अपने
पते
पे
भेज
दिया
Fahmi Badayuni
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दु'आ
करो
कि
सलामत
रहे
मिरी
हिम्मत
ये
इक
चराग़
कई
आँधियों
पे
भारी
है
Waseem Barelvi
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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तुझे
किसी
ने
ग़लत
कह
दिया
मेरे
बारे
नहीं
मियाँ
मैं
दिलों
को
दुखाने
वाला
नहीं
Ali Zaryoun
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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मक़तल-ए-शौक़
के
आदाब
निराले
हैं
बहुत
दिल
भी
क़ातिल
को
दिया
करते
हैं
सर
से
पहले
Ali Sardar Jafri
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इस
तरह
रोते
हैं
हम
याद
तुझे
करते
हुए
जैसे
तू
होता
तो
सीने
से
लगा
लेता
हमें
Vikram Gaur Vairagi
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तेरा
बंदा
चला
गया
मालिक
ये
तो
काफ़ी
बुरा
हुआ
मालिक
तूने
दुनिया
बता
के
भेजा
था
मैं
जहन्नम
में
आ
गया
मालिक
तेरे
जैसों
की
होती
थी
दुनिया
मेरे
जैसों
का
कौन
था
मालिक
किन
ग़मों
में
उलझ
गया
था
मैं
कह
रहा
था
कि
शुक्रिया
मालिक
सारे
नौकर
बहुत
परेशाँ
थे
ये
ख़बर
थी
कि
मर
गया
मालिक
हाँ
ये
सच
है
कि
मैं
तसव्वुर
हूँ
इस
तसव्वुर
का
दायरा
मालिक
तू
मेरा
दुख
नहीं
समझता
है
तू
भी
इंसान
हो
गया
मालिक
मैंने
बस
उसके
लब
ही
देखे
थे
हो
गया
था
बहुत
ख़फ़ा
मालिक
अब
तो
मैं
तेरे
काम
का
हूँ
बस
मुझ
में
अब
कुछ
नहीं
बचा
मालिक
मैंने
वीरान
कर
लिया
ख़ुद
को
मुझ
में
आबाद
हो
गया
मालिक
एक
ही
हैं
तेरे
मेरे
ग़म
भी
एक
ही
है
तेरा
मेरा
मालिक
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Vikram Gaur Vairagi
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साँस
तन्हाई
से
भरती
ही
चली
जाती
है
याद
सीने
में
उतरती
ही
चली
जाती
है
पहले
कमरे
में
बिखरती
है
अचानक
इक
दिन
फिर
ये
तन्हाई
बिखरती
ही
चली
जाती
है
वो
जो
लड़की
है
न
क़ुदरत
का
बदल
लगती
है
ग़ुस्सा
करती
है
तो
करती
ही
चली
जाती
है
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Vikram Gaur Vairagi
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टूटी
चीज़ों
को
बदल
दें
था
बेहतर
वरना
तू
जो
चाहता
तो
दोबारा
बना
लेता
हमें
इस
तरह
रोते
हैं
याद
करते
हुए
हम
तुझे
जैसे
तू
होता
तो
सीने
से
लगा
लेता
हमें
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Vikram Gaur Vairagi
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किस
तरह
मेरी
जान
ये
किरदार
बने
है
जो
तुझ
सेे
मिले
है
वो
तेरा
यार
बने
है
Vikram Gaur Vairagi
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