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Fahmi Badayuni
main ne us ki taraf se khat likkha
main ne us ki taraf se khat likkha | मैं ने उस की तरफ़ से ख़त लिक्खा
- Fahmi Badayuni
मैं
ने
उस
की
तरफ़
से
ख़त
लिक्खा
और
अपने
पते
पे
भेज
दिया
- Fahmi Badayuni
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तुमको
हिचकी
लेने
से
भी
दिक़्क़त
थी
मैंने
तुमको
याद
ही
करना
छोड़
दिया
Mehshar Afridi
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क्या
ख़ूब
तुम
ने
ग़ैर
को
बोसा
नहीं
दिया
बस
चुप
रहो
हमारे
भी
मुँह
में
ज़बान
है
Mirza Ghalib
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दुनिया
के
भरम
को
कुछ
यूँँ
तोड़
दिया
मैंने
इस
बार
नसीबों
का
रुख़
मोड़
दिया
मैंने
Harsh saxena
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एक
परिन्दे
का
घर
उजाड़
दिया
किसी
ने
बस
बच्चों
के
इक
दिन
के
झूले
की
ख़ातिर
Pankaj murenvi
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ये
इश्क़
आग
है
और
वो
बदन
शरारा
है
ये
सर्द
बर्फ़
सा
लड़का
पिघलने
वाला
है
Shadab Asghar
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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दिया
जला
के
सभी
बाम-ओ-दर
में
रखते
हैं
और
एक
हम
हैं
इसे
रह-गुज़र
में
रखते
हैं
समुंदरों
को
भी
मालूम
है
हमारा
मिज़ाज
कि
हम
तो
पहला
क़दम
ही
भँवर
में
रखते
हैं
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Abrar Kashif
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डाली
है
ख़ुद
पे
ज़ुल्म
की
यूँँ
इक
मिसाल
और
उसके
बग़ैर
काट
दिया
एक
साल
और
Subhan Asad
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तुम
भी
वैसे
थे
मगर
तुम
को
ख़ुदा
रहने
दिया
इस
तरह
तुम
को
ज़माने
से
जुदा
रहने
दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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इलाज
ये
है
कि
मजबूर
कर
दिया
जाऊँ
वगरना
यूँँ
तो
किसी
की
नहीं
सुनी
मैंने
Jaun Elia
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वो
कहीं
था
कहीं
दिखाई
दिया
मैं
जहाँ
था
वहीं
दिखाई
दिया
ख़्वाब
में
इक
हसीं
दिखाई
दिया
वो
भी
पर्दा-नशीं
दिखाई
दिया
जब
तलक
तू
नहीं
दिखाई
दिया
घर
कहीं
का
कहीं
दिखाई
दिया
रोज़
चेहरे
ने
आइने
बदले
जो
नहीं
था
नहीं
दिखाई
दिया
बद-मज़ा
क्यूँँ
हैं
आसमाँ
वाले
मैं
ज़मीं
था
ज़मीं
दिखाई
दिया
उस
को
ले
कर
चली
गई
गाड़ी
फिर
हमें
कुछ
नहीं
दिखाई
दिया
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Fahmi Badayuni
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ज़रा
मोहतात
होना
चाहिए
था
बग़ैर
अश्कों
के
रोना
चाहिए
था
अब
उन
को
याद
कर
के
रो
रहे
हैं
बिछड़ते
वक़्त
रोना
चाहिए
था
मिरी
वादा-ख़िलाफ़ी
पर
वो
चुप
है
उसे
नाराज़
होना
चाहिए
था
चला
आता
यक़ीनन
ख़्वाब
में
वो
हमें
कल
रात
सोना
चाहिए
था
सुई
धागा
मोहब्बत
ने
दिया
था
तो
कुछ
सीना
पिरोना
चाहिए
था
हमारा
हाल
तुम
भी
पूछते
हो
तुम्हें
मालूम
होना
चाहिए
था
वफ़ा
मजबूर
तुम
को
कर
रही
थी
तो
फिर
मजबूर
होना
चाहिए
था
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Fahmi Badayuni
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जाहिलों
को
सलाम
करना
है
और
फिर
झूट-मूट
डरना
है
काश
वो
रास्ते
में
मिल
जाए
मुझ
को
मुँह
फेर
कर
गुज़रना
है
पूछती
है
सदा-ए-बाल-ओ-पर
क्या
ज़मीं
पर
नहीं
उतरना
है
सोचना
कुछ
नहीं
हमें
फ़िलहाल
उन
से
कोई
भी
बात
करना
है
भूक
से
डगमगा
रहे
हैं
पाँव
और
बाज़ार
से
गुज़रना
है
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Fahmi Badayuni
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निगाहें
फेर
ली
घबरा
के
मैंने
वो
तुम
से
ख़ूब-सूरत
लग
रही
थी
Fahmi Badayuni
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उसने
ख़त
का
जवाब
भेजा
है
चार
लेकिन
हैं
एक
हाँ
के
साथ
Fahmi Badayuni
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