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Fahmi Badayuni
usne KHat ka javaab bheja hai
usne KHat ka javaab bheja hai | उसने ख़त का जवाब भेजा है
- Fahmi Badayuni
उसने
ख़त
का
जवाब
भेजा
है
चार
लेकिन
हैं
एक
हाँ
के
साथ
- Fahmi Badayuni
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जानता
हूँ
कि
तुझे
साथ
तो
रखते
हैं
कई
पूछना
था
कि
तेरा
ध्यान
भी
रखता
है
कोई?
Umair Najmi
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आप
के
बाद
हर
घड़ी
हम
ने
आप
के
साथ
ही
गुज़ारी
है
Gulzar
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इस
से
पहले
कि
तुझे
और
सहारा
न
मिले
मैं
तिरे
साथ
हूँ
जब
तक
मिरे
जैसा
न
मिले
Afkar Alvi
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टेंशन
से
मरेगा
न
कोरोने
से
मरेगा
इक
शख़्स
तेरे
साथ
न
होने
से
मरेगा
Idris Babar
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साथ
में
तू
मेरे
दो
गाम
तो
चल
सकता
है
इतना
चलने
से
मेरा
काम
तो
चल
सकता
है
तेरे
दिल
में
किसी
शायर
की
जगह
तो
होगी
इस
इलाके
में
मेरा
नाम
तो
चल
सकता
है
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Ashu Mishra
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बारिशें
जाड़े
की
और
तन्हा
बहुत
मेरा
किसान
जिस्म
और
इकलौता
कंबल
भीगता
है
साथ-साथ
Parveen Shakir
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जो
न
खेली
होली
'अमृत'
के
साथ
में
हाथों
में
दीवाली
तक
गुलाल
रहेगा
Amritanshu Sharma
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कभी
चाहत
पे
शक
करते
हुए
ये
भी
नहीं
सोचा
तुम्हारे
साथ
क्यूँ
रहते
अगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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तेरे
साथ
भी
मुश्किल
पड़ता
था
तेरे
बिन
तो
गुजारा
क्या
होता
गर
तू
भी
नहीं
होता
तो
न
जाने
दोस्त
हमारा
क्या
होता
Siddharth Saaz
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सिर्फ़
तस्वीर
रह
गई
बाक़ी
जिस
में
हम
एक
साथ
बैठे
हैं
Bilal Ameer Ahmad
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कमरा
खोला
तो
आँख
भर
आई
ये
जो
ख़ुशबू
है
जिस्म
थी
पहले
Fahmi Badayuni
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जब
रेतीले
हो
जाते
हैं
पर्वत
टीले
हो
जाते
हैं
तोड़े
जाते
हैं
जो
शीशे
वो
नोकीले
हो
जाते
हैं
बाग़
धुएँ
में
रहता
है
तो
फल
ज़हरीले
हो
जाते
हैं
नादारी
में
आग़ोशों
के
बंधन
ढीले
हो
जाते
हैं
फूलों
को
सुर्ख़ी
देने
में
पत्ते
पीले
हो
जाते
हैं
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Fahmi Badayuni
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कुछ
न
कुछ
बोलते
रहो
हम
सेे
चुप
रहोगे
तो
लोग
सुन
लेंगे
Fahmi Badayuni
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वफ़ा-दारी
ग़नीमत
हो
गई
क्या
मोहब्बत
भी
मुरव्वत
हो
गई
क्या
अदालत
फ़र्श-ए-मक़्तल
धो
रही
है
उसूलों
की
शहादत
हो
गई
क्या
ज़रा
ईमान-दारी
से
बताओ
हमें
तुम
से
मोहब्बत
हो
गई
क्या
फ़रिश्तों
जैसी
सूरत
क्यूँँ
बना
ली
कोई
हम
से
शरारत
हो
गई
क्या
किताबत
रोकने
का
क्या
सबब
है
कहानी
की
इशाअत
हो
गई
क्या
मज़ार-ए-पीर
से
आवाज़
आई
फ़क़ीरी
बादशाहत
हो
गई
क्या
घटाएँ
पूछने
को
आ
रही
हैं
हमारी
छत
की
हालत
हो
गई
क्या
ये
कैसा
जश्न
है
उस
की
गली
में
कोई
बंदिश
इजाज़त
हो
गई
क्या
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Fahmi Badayuni
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दिल
जब
ख़ाली
हो
जाता
है
और
भी
भारी
हो
जाता
है
जब
तू
साक़ी
हो
जाता
है
इश्क़
शराबी
हो
जाता
है
मैं
जब
तक
कुछ
तय
करता
हूँ
सब
कुछ
माज़ी
हो
जाता
है
उसके
छूते
ही
क़िस्मत
का
ताला
चाभी
हो
जाता
है
पहले
तू
काफ़ी
होता
था
अब
नाकाफ़ी
हो
जाता
है
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Fahmi Badayuni
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