nigaahon ko nish | निगाहों को निशाना चाहिए था

  - Dinesh Kumar Drouna
निगाहोंकोनिशानाचाहिएथा
कोईपागलदीवानाचाहिएथा
येमानाथेख़फ़ाहमफिरभीलेकिन
तुम्हेंनज़दीकआनाचाहिएथा
मैंअपनेजब्रपरहैरानहूँख़ुद
मुझेतोटूटजानाचाहिएथा
मुझेपाकररवाँसाहोरहेहो
तोक्यातुमकोज़मानाचाहिएथा
वोक़िस्सायादरखनेकानहींहै
सुनाऔरभूलजानाचाहिएथा
जिसेगरजाननाहोदर्दक्याहै
किसीसेदिललगानाचाहिएथा
भुलानेकीयहीइकशर्तभीथी
मुझेवोयादआनाचाहिएथा
वोजोआगाहकरताफिररहाहै
उसीकोआज़मानाचाहिएथा
ज़रासीबातऔरतर्क-ए-तअ'ल्लुक़
तुम्हेंतोबसबहानाचाहिएथा
  - Dinesh Kumar Drouna
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