badaa hi talkh lahjaa hai zabaan par | बड़ा ही तल्ख़ लहजा है ज़बाँ पर

  - Dinesh Kumar Drouna
बड़ाहीतल्ख़लहजाहैज़बाँपर
लिएहोबोझकैसाजिस्म-ओ-जाँपर
निशाँदीवार-ए-दिलकाकहरहाहै
कोईतस्वीरथीपहलेयहाँपर
जहाँवोदिखरहेहोतेहैंफिरतो
कोईदिखतानहींहमकोवहाँपर
मिरीक़ीमतमुझेभीजाननीथी
सोमैंनेरखदियाख़ुदकोदुकाँपर
जहाँकाहरमुसाफ़िरराहबरहो
तरसआताहैऐसेकारवाँपर
मिरादार-ओ-मदार-ए-ज़िन्दगीभी
टिकाहैबसतुम्हारीएकहाँपर
जानेकौनसाघरहोतुम्हारा
सोदस्तकदेरहाहूँहरमकाँपर
उसेहैरानकरनाथासोमैंने
ज़मींलेजाकेरखदीआसमाँपर
  - Dinesh Kumar Drouna
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