sukoon dil ko nazar ko mirii qaraar nahin | सुकून दिल को नज़र को मिरी क़रार नहीं

  - Daud Nishat
सुकूनदिलकोनज़रकोमिरीक़रारनहीं
येएकमर्ग-ए-मुसलसलहैइंतिज़ारनहीं
कलीकेलबपेतबस्सुमकोढूँडनेवालो
बराए-नामभीगुलशनमेंअबबहारनहीं
हमेंपहुँचनेसेमंज़िलपेकौनरोकेगा
हमारीराहमेंजबयासकाग़ुबारनहीं
करोवोमश्क़किहँसतेरहोख़िज़ाँमेंभी
गुल-ओ-चमनमेंबहारोंपेए'तिबारनहीं
ख़ुदाबचाएगुलोंकोफ़रेब-ए-गुलशनसे
फ़क़तबहारकाधोकाहैयेबहारनहीं
क़समहैअज़्मत-ए-मय-ख़ाना-ए-मोहब्बतकी
घटाहैजामहैसाक़ीहैबादा-ख़्वारनहीं
'निशात'पीनेपिलानेकीआरज़ूबे-कार
उठाजामअभीमौसम-ए-बहारनहीं
  - Daud Nishat
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