zindagi ko maut ki zad par jo la saka nahin | ज़िंदगी को मौत की ज़द पर जो ला सकता नहीं

  - Daud Nishat
ज़िंदगीकोमौतकीज़दपरजोलासकतानहीं
मौतकेआग़ोशमेंवोमुस्कुरासकतानहीं
उसकीतोहमतअपनेसरबार-ए-अमानतलेलिया
बोझवोइंसाँजोअपनाभीउठासकतानहीं
रब्तहैहरशयसेफिरभीइसजहाँमेंदोस्तो
आदमीख़ुदआदमीकेकामसकतानहीं
येजहाँहैआज़माइश-गाह-ए-अरबाब-ए-वफ़ा
लाखचाहेभीतोइंसाँमुस्कुरासकतानहीं
क्याइसीकानामहैसाक़ीतिरीदरिया-दिली
मयतोमयपानीभीतूहमकोपिलासकतानहीं
अज़्मकासूरजलिएमैंजगमगाताहूँ'नशात'
इनअँधेरोंकोकभीख़ातिरमेंलासकतानहीं
  - Daud Nishat
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