jab tak ki dil men jazba-e-deewangi na ho | जब तक कि दिल में जज़्बा-ए-दीवानगी न हो

  - Daud Nishat
जबतककिदिलमेंजज़्बा-ए-दीवानगीहो
लज़्ज़त-कश-ए-हयात-ए-वफ़ाबे-ख़ुदीहो
क्यावोकरेंगेजल्वा-ए-जानाँकीआरज़ू
जिनकीनज़रमेंजुरअत-ए-नज़्ज़ारगीहो
घबरागयाहूँज़ीस्तकीतल्ख़ीसेइसक़दर
इसज़िंदगीकेबा'दकोईज़िंदगीहो
मानाख़ुशीमेंहोताहैबे-ख़ुदहरआदमी
ख़ुदकोभीभूलजाऊँमैंऐसीख़ुशीहो
ग़म-ए-हयाततुझेढूँढताहैदिल
वोज़ीस्तक्याकिजिसमेंग़म-ए-ज़िंदगीहो
दुनियाकीतीरगीकोमिटाएँगेकिसतरह
जिनकेदिल-ओ-निगाहमेंकुछरौशनीहो
रहरहकेउठरहाहैहरइकसम्तक्यूँधुआँ
नफ़रतकीआगशहरमेंहर-सूलगीहो
फ़िक्र-ए-सुख़नकेवास्तेग़मचाहिए'नशात'
जबतककिदिलमेंदर्दहोशा'इरीहो
  - Daud Nishat
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