raushni kab thii mire daag-e-jigar se pehleus ne paai hai ziya shams-o-qamar se pahle | रौशनी कब थी मिरे दाग़-ए-जिगर से पहले

  - Daud Nishat
रौशनीकबथीमिरेदाग़-ए-जिगरसेपहले
उसनेपाईहैज़ियाशम्स-ओ-क़मरसेपहले
अश्कअबतकमिरीआँखोंसेबरसेपहले
होंटशबनमकेभीइकबूँदकोतरसेपहले
जिसकीतनवीरमेंपिन्हाँथींहज़ारोंज़ुल्मात
इकसहरऐसीभीदेखीहैसहरसपहले
मेरीख़ुद्दारतबीअतकातक़ाज़ाथायही
आशियाँफूँकदियाबर्क़-ओ-शररसेपहले
फिरज़मानेकीनज़रमेरीतरफ़क्यूँउट्ठी
बचकेचलनाथामुझेउनकीनज़रसेपहले
वुसअ'त-ए-कौन-ओ-मकाँग़र्क़हुईहैजिसमें
ऐसेतूफ़ाँभीउठेदीदा-ए-तरसेपहले
ख़ुल्दकहतेहैंजिसेहैवोइसीकाख़ाका
इल्मथाकबयेतिरीराहगुज़रसेपहले
चीरकरज़ुल्मत-ए-शबवक़्तकेतेशेसे'निशात'
इकनईसुब्हउभारेंगेसहरसपहले
  - Daud Nishat
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