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Vishal Bagh
ba-hunar hoke kuchh na kar paana
ba-hunar hoke kuchh na kar paana | बा-हुनर होके कुछ न कर पाना
- Vishal Bagh
बा-हुनर
होके
कुछ
न
कर
पाना
रेज़ा-रेज़ा
बिखर
के
ढेह
जाना
मुझको
बेहद
उदास
करता
है
ख़ास
लोगों
का
आम
रह
जाना
- Vishal Bagh
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अब
उदास
फिरते
हो
सर्दियों
की
शामों
में
इस
तरह
तो
होता
है
इस
तरह
के
कामों
में
Shoaib Bin Aziz
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हवा
ख़फ़ा
थी
मगर
इतनी
संग-दिल
भी
न
थी
हमीं
को
शमा
जलाने
का
हौसला
न
हुआ
Qaisar-ul-Jafri
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देर
से
आने
पर
वो
ख़फ़ा
था
आख़िर
मान
गया
आज
मैं
अपने
बाप
से
मिलने
क़ब्रिस्तान
गया
Afzal Khan
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आज
तो
बे-सबब
उदास
है
जी
इश्क़
होता
तो
कोई
बात
भी
थी
Nasir Kazmi
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किसी
से
दूरी
बनाई
किसी
के
पास
रहे
हज़ार
कोशिशें
कर
लीं
मगर,
उदास
रहे
Sawan Shukla
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मना
भी
लूँगा
गले
भी
लगाऊँगा
मैं
'अली'
अभी
तो
देख
रहा
हूँ
उसे
ख़फ़ा
कर
के
Ali Zaryoun
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इसी
खंडर
में
कहीं
कुछ
दिए
हैं
टूटे
हुए
इन्हीं
से
काम
चलाओ
बड़ी
उदास
है
रात
Firaq Gorakhpuri
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दो
दफ़ा
ग़ुस्सा
हुए
वो
एक
ग़लती
पर
मेरी
रात
की
रोटी
सवेरे
काम
में
लाई
गई
Tanoj Dadhich
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दुनिया
की
फ़िक्र
छोड़,
न
यूँँ
अब
उदास
बैठ
ये
वक़्त
रब
की
देन
है,
अम्मी
के
पास
बैठ
Salman Zafar
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लम्हे
उदास
उदास
फ़ज़ाएं
घुटी
घुटी
दुनिया
अगर
यही
है
तो
दुनिया
से
बच
के
चल
Shakeel Badayuni
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तेरा
इकरार
मुझे
सिर्फ़
तेरा
कर
देता
तेरे
इंकार
ने
ते
माँग
बढ़ाई
मेरी
Vishal Bagh
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उम्र
ये
मेरी
सिर्फ़
लबादा
मेरे
खद
ओ
ख़ाल
का
है
मेरा
दिल
तो
मुश्किल
से
कुछ
सोलह
सतरह
साल
का
है!
Vishal Bagh
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उसके
हाथों
में
बस
हम
ही
जँचते
थे
दावा
सोने
का
कंगन
भी
करता
था
Vishal Bagh
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दानिशमंदों
रस्ता
बतला
सकते
हो
दीवाना
हूँ
वीराने
तक
जाना
है
जन्नत
वाले
थोड़ा
पहले
उतरेंगे
रिन्दों
को
तो
मयख़ाने
तक
जाना
है
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Vishal Bagh
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जब
वो
बोले
कि
कोई
प्यारा
था
उनका
मेरी
तरफ़
इशारा
था
हम
निकल
आए
जिस्म
से
बाहर
उसने
कुछ
इस
तरह
पुकारा
था
फेर
देता
था
वो
नज़र
अपनी
हर
नज़र
का
यही
उतारा
था
डूब
जाना
ही
ठीक
था
मेरा
मेरे
दोनों
तरफ़
किनारा
था
आख़िरश
बोझ
हो
गया
देखो
मुझको
जो
जिस्म
जाँ
से
प्यारा
था
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Vishal Bagh
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