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Vishal Bagh
jab vo bole ki koi pyaara tha
jab vo bole ki koi pyaara tha | जब वो बोले कि कोई प्यारा था
- Vishal Bagh
जब
वो
बोले
कि
कोई
प्यारा
था
उनका
मेरी
तरफ़
इशारा
था
हम
निकल
आए
जिस्म
से
बाहर
उसने
कुछ
इस
तरह
पुकारा
था
फेर
देता
था
वो
नज़र
अपनी
हर
नज़र
का
यही
उतारा
था
डूब
जाना
ही
ठीक
था
मेरा
मेरे
दोनों
तरफ़
किनारा
था
आख़िरश
बोझ
हो
गया
देखो
मुझको
जो
जिस्म
जाँ
से
प्यारा
था
- Vishal Bagh
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हम
उस
में
बैठ
के
करते
हैं
साधना
तेरी
हमारा
जिस्म
भी
भीतर
से
एक
शिवाला
है
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Irshad Khan Sikandar
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अभी
हमको
मुनासिब
आप
होते
से
नहीं
लगते
ब–चश्म–ए–तर
मुख़ातिब
हैं
प
रोते
से
नहीं
लगते
वही
दर्या
बहुत
गहरा
वही
तैराक
हम
अच्छे
हुआ
है
दफ़्न
मोती
अब
कि
गोते
से
नहीं
लगते
ये
आई
रात
आँखों
को
चलो
खूँ–खूँ
किया
जाए
बदन
ये
सो
भी
जाए
आँख
सोते
से
नहीं
लगते
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Dhiraj Singh 'Tahammul'
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सख़्त
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
रूह
मिरी
जिस्म-ए-यार
आ
कि
बेचारी
को
सहारा
मिल
जाए
Farhat Ehsaas
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जिस्म
आया
किसी
के
हिस्से
में
दिल
किसी
और
की
अमानत
है
Shariq Kaifi
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अजीब
हालत
है
जिस्म-ओ-जाँ
की
हज़ार
पहलू
बदल
रहा
हूँ
वो
मेरे
अंदर
उतर
गया
है
मैं
ख़ुद
से
बाहर
निकल
रहा
हूँ
Azm Shakri
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मेरे
जिस्म
से
वक़्त
ने
कपड़े
नोच
लिए
मंज़र
मंज़र
ख़ुद
मेरी
पोशाक
हुआ
Azm Shakri
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हलाल
रिज़्क़
का
मतलब
किसान
से
पूछो
पसीना
बन
के
बदन
से
लहू
निकलता
है
Aadil Rasheed
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मुझको
बदन
नसीब
था
पर
रूह
के
बग़ैर
उसने
दिया
भी
फूल
तो
ख़ुशबू
निकाल
कर
Ankit Maurya
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उस
साँवले
से
जिस्म
को
देखा
ही
था
कि
बस
घुलने
लगे
ज़बाँ
पे
मज़े
चाकलेट
के
Shahid Kabir
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अब
सुलगती
है
हथेली
तो
ख़याल
आता
है
वो
बदन
सिर्फ़
निहारा
भी
तो
जा
सकता
था
Ameer Imam
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साफ़
दिखता
है
तेरे
चेहरे
पे
इश्क़
डाले
है
डेरे
चेहरे
पे
इतनी
शिद्दत
से
देखिए
मुझको
नील
पड़
जाएँ
मेरे
चेहरे
पे
इतनी
आँखें
नहीं
है
दुनिया
में
जितने
चेहरे
हैं
तेरे
चेहरे
पे
सोलहवां
साल
लग
गया
जैसे
उसने
जब
हाथ
फेरे
चेहरे
पे
हम
तुझे
देख
ही
नहीं
पाए
इतनी
नज़रें
थी
तेरे
चेहरे
पे
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Vishal Bagh
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बाद
उसके
दिल-नगर
फिर
बस
गया
एहतरामन
इक
गली
वीरान
है
Vishal Bagh
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उसने
महफ़िल
से
उठाया
हमको
जिसको
पलकों
पे
बिठाया
हमने
Vishal Bagh
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ख़बर
सुनकर
वो
ये
इतरा
रहा
है
मुझे
उसका
बिछोड़ा
खा
रहा
है
मेरे
सय्याद
को
कोई
बुला
दो
मेरे
पिंजरे
को
तोड़ा
जा
रहा
है
निकलना
है
हमें
कब
से
सफ़र
पर
मगर
ये
जिस्म
आड़े
आ
रहा
है
मैं
उसको
याद
भी
करना
न
चाहूँ
वो
आकर
ख़्वाब
में
उकसा
रहा
है
चलो
उसको
अज़ीयत
से
निकालें
सुना
है
अब
भी
वो
पछता
रहा
है
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Vishal Bagh
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बा-हुनर
होके
कुछ
न
कर
पाना
रेज़ा-रेज़ा
बिखर
के
ढेह
जाना
मुझको
बेहद
उदास
करता
है
ख़ास
लोगों
का
आम
रह
जाना
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Vishal Bagh
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