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Vishal Bagh
saaf dikhta hai tere chehre pe
saaf dikhta hai tere chehre pe | साफ़ दिखता है तेरे चेहरे पे
- Vishal Bagh
साफ़
दिखता
है
तेरे
चेहरे
पे
इश्क़
डाले
है
डेरे
चेहरे
पे
इतनी
शिद्दत
से
देखिए
मुझको
नील
पड़
जाएँ
मेरे
चेहरे
पे
इतनी
आँखें
नहीं
है
दुनिया
में
जितने
चेहरे
हैं
तेरे
चेहरे
पे
सोलहवां
साल
लग
गया
जैसे
उसने
जब
हाथ
फेरे
चेहरे
पे
हम
तुझे
देख
ही
नहीं
पाए
इतनी
नज़रें
थी
तेरे
चेहरे
पे
- Vishal Bagh
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उतर
गया
है
चेहरा
तेरे
जाने
से
लॉक
नहीं
खुलता
है
अब
मोबाइल
का
Tanoj Dadhich
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मुमकिन
है
कि
सदियों
भी
नज़र
आए
न
सूरज
इस
बार
अँधेरा
मिरे
अंदर
से
उठा
है
Aanis Moin
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हाए
उसके
हाथ
पीले
होने
का
ग़म
इतना
रोए
हैं
कि
आँखें
लाल
कर
ली
Harsh saxena
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तुम
तो
सर्दी
की
हसीं
धूप
का
चेहरा
हो
जिसे
देखते
रहते
हैं
दीवार
से
जाते
हुए
हम
Nomaan Shauque
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वो
आँखें
बुझ
चुकी
होंगी
नज़ारा
हो
चुका
होगा
'अली'
वो
शख़्स
अब
दुनिया
को
प्यारा
हो
चुका
होगा
Ali Zaryoun
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कोई
चेहरा
किसी
को
उम्र
भर
अच्छा
नहीं
लगता
हसीं
है
चाँद
भी,
शब
भर
मगर
अच्छा
नहीं
लगता
Munawwar Rana
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कभी
ज़िन्दगी
से
यूँँ
न
चुराया
करो
नज़र
कि
मौजूद
भी
रहो
तो
न
आया
करो
नज़र
S M Afzal Imam
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इक
गुल
के
मुरझाने
पर
क्या
गुलशन
में
कोहराम
मचा
इक
चेहरा
कुम्हला
जाने
से
कितने
दिल
नाशाद
हुए
Faiz Ahmad Faiz
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एक
ही
बार
नज़र
पड़ती
है
उन
पर
‘ताबिश’
और
फिर
वो
ही
लगातार
नज़र
आते
हैं
Zubair Ali Tabish
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मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
Siddharth Saaz
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दुआए
मांगते
हैं
इसीलिए
अपने
उजड़ने
की
हमें
तो
यार
तेरे
हाथ
से
तामीर
होना
हैं
Vishal Bagh
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जब
तलक
अनजान
थे
मेहफ़ूज़
थे
जान
लेना
जानलेवा
हो
गया
Vishal Bagh
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आज
फिर
कुफ़्र
कमाया
हमने
शोर
को
शे'र
सुनाया
हमने
Vishal Bagh
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उसके
हाथों
में
बस
हम
ही
जँचते
थे
दावा
सोने
का
कंगन
भी
करता
था
Vishal Bagh
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जब
वो
बोले
कि
कोई
प्यारा
था
उनका
मेरी
तरफ़
इशारा
था
हम
निकल
आए
जिस्म
से
बाहर
उसने
कुछ
इस
तरह
पुकारा
था
फेर
देता
था
वो
नज़र
अपनी
हर
नज़र
का
यही
उतारा
था
डूब
जाना
ही
ठीक
था
मेरा
मेरे
दोनों
तरफ़
किनारा
था
आख़िरश
बोझ
हो
गया
देखो
मुझको
जो
जिस्म
जाँ
से
प्यारा
था
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Vishal Bagh
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