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Siddharth Saaz
main har shaKHs ke chehre ko bas is ummeed se takta hooñ
main har shaKHs ke chehre ko bas is ummeed se takta hooñ | मैं हर शख़्स के चेहरे को बस इस उम्मीद से तकता हूँ
- Siddharth Saaz
मैं
हर
शख़्स
के
चेहरे
को
बस
इस
उम्मीद
से
तकता
हूँ
शायद
से
मुझको
दो
आँखें
तेरे
जैसी
दिख
जाएँ
- Siddharth Saaz
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उठते
नहीं
हैं
अब
तो
दु'आ
के
लिए
भी
हाथ
किस
दर्जा
ना-उमीद
हैं
परवरदिगार
से
Akhtar Shirani
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लो
आज
हमने
तोड़
दिया
रिश्ता-ए-उम्मीद
लो
अब
कभी
गिला
न
करेंगे
किसी
से
हम
Sahir Ludhianvi
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तुम
सेे
मिल
कर
इतनी
तो
उम्मीद
हुई
है
इस
दुनिया
में
वक़्त
बिताया
जा
सकता
है
Manoj Azhar
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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इन
से
उम्मीद
न
रख
हैं
ये
सियासत
वाले
ये
किसी
से
भी
मोहब्बत
नहीं
करने
वाले
Nadim Nadeem
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इस
दुनिया
के
कहने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
पत्थर
रख
लो
सीने
पर
उम्मीद
न
रक्खो
Vishal Singh Tabish
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मुझे
दुश्मन
से
भी
ख़ुद्दारी
की
उम्मीद
रहती
है
किसी
का
भी
हो
सर
क़दमों
में
सर
अच्छा
नहीं
लगता
Javed Akhtar
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झिझकता
हूँ
उसे
इल्ज़ाम
देते
कोई
उम्मीद
अब
भी
रोकती
है
Shariq Kaifi
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ये
सच
है
नफ़रतों
की
आग
ने
सब
कुछ
जला
डाला
मगर
उम्मीद
की
ठण्डी
हवाएँ
रोज़
आती
हैं
Munawwar Rana
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अब
तो
इस
राह
से
वो
शख़्स
गुज़रता
भी
नहीं
अब
किस
उम्मीद
पे
दरवाज़े
से
झांके
कोई
Parveen Shakir
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बारिश
हो
जाने
के
बाद
भी
मिट्टी
गीली
रहती
है
मैं
तेरे
जाने
के
बाद
भी
तुझ
सेे
बातें
करता
हूँ
Siddharth Saaz
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सब
तेरे
ही
इश्क़
के
बीमार
थे
चारों
तरफ़
कुछ
तेरे
छूने
से
अच्छे
हो
गए,
कुछ
रह
गए
Siddharth Saaz
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तू
तो
वाक़िफ़
है
रिवाज़-ए-ग़म
से
इसके
इश्क़
तो
तेरा
भी
ये
पहला
नहीं
है
Siddharth Saaz
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जो
सावन
होते
सूखा,
उस
फूल
पे
लानत
हो
मुझ
पे
लानत,
तेरे
होते,
यार
उदासी
है
Siddharth Saaz
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जब
से
तूने
ये
बोला
था
"बदन
का
क्या
है
मिट्टी
है"
तब
से
तेरी
पीठ
पे
मुझको
हरसिंगार
उगाने
थे
Siddharth Saaz
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