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Vishal Bagh
aaj phir kufr kamaaya hamne
aaj phir kufr kamaaya hamne | आज फिर कुफ़्र कमाया हमने
- Vishal Bagh
आज
फिर
कुफ़्र
कमाया
हमने
शोर
को
शे'र
सुनाया
हमने
- Vishal Bagh
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सुख़न
का
जोश
कम
होता
नहीं
है
वगरना
क्या
सितम
होता
नहीं
है
भले
तुम
काट
दो
बाज़ू
हमारे
क़लम
का
सर
क़लम
होता
नहीं
है
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Baghi Vikas
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चला
है
जोश
में
मक़्तल
की
ओर
जोशीला
उसी
को
देख
के
कितनों
को
अक़्ल
आई
है
Tarun Bharadwaj
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मैं
चोट
कर
तो
रहा
हूँ
हवा
के
माथे
पर
मज़ा
तो
जब
था
कि
कोई
निशान
भी
पड़ता
Abhishek shukla
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वो
शांत
बैठा
है
कब
से
मैं
शोर
क्यूँँॅं
न
करूँॅं
बस
एक
बार
वो
कह
दे
कि
चुप
तो
चूँ
न
करूँॅं
Charagh Sharma
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शे'र
कहते
हैं
कई
लोग
मज़ा
देते
हैं
हम
मगर
वो
हैं
जो
दीवाना
बना
देते
हैं
Astitwa Ankur
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देख
ज़िंदाँ
से
परे
रंग-ए-चमन
जोश-ए-बहार
रक़्स
करना
है
तो
फिर
पाँव
की
ज़ंजीर
न
देख
Majrooh Sultanpuri
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हाल-ए-दिल
सब
सेे
छुपाने
में
मज़ा
आता
है
आप
पूछें
तो
बताने
में
मज़ा
आता
है
Nawaz Deobandi
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सफ़र
में
आख़िरी
पत्थर
के
बाद
आएगा
मज़ा
तो
यार
दिसंबर
के
बाद
आएगा
Rahat Indori
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तुमको
देखें
तो
देखते
जाएँ
देखने
का
अलग
मज़ा
है
तुम्हें
Pravin Rai
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मिरी
वफ़ा
का
तिरा
लुत्फ़
भी
जवाब
नहीं
मिरे
शबाब
की
क़ीमत
तिरा
शबाब
नहीं
Asrar Ul Haq Majaz
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वो
जो
लिखा
है
सब
किताबों
में
वो
ही
शामिल
नहीं
निसाबों
में
उसकी
तासीर
ऐसे
काटी
है
हमने
घोला
उसे
शराबों
में
ये
मेरी
हिचकियाँ
बताती
हैं
मैं
बक़ाया
हूँ
कुछ
हिसाबों
में
तो
कोई
तजरुबा
ही
कर
लें
क्या
कुछ
नहीं
मिल
रहा
किताबों
में
हम
उसे
यूँं
ही
मिल
गए
होते
उसने
ढूंढा
नहीं
ख़राबों
में
आओ
और
आ
के
फिर
बिछड़
जाओ
कुछ
इज़ाफ़ा
करो
'अज़ाबों
में
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Vishal Bagh
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जब
वो
बोले
कि
कोई
प्यारा
था
उनका
मेरी
तरफ़
इशारा
था
हम
निकल
आए
जिस्म
से
बाहर
उसने
कुछ
इस
तरह
पुकारा
था
फेर
देता
था
वो
नज़र
अपनी
हर
नज़र
का
यही
उतारा
था
डूब
जाना
ही
ठीक
था
मेरा
मेरे
दोनों
तरफ़
किनारा
था
आख़िरश
बोझ
हो
गया
देखो
मुझको
जो
जिस्म
जाँ
से
प्यारा
था
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Vishal Bagh
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तुम
जो
कहते
थे
ना
इक
दिन
छू
लोगे
छू
लेते
ना
मेरा
मन
भी
करता
था
Vishal Bagh
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उम्र
ये
मेरी
सिर्फ़
लबादा
मेरे
खद
ओ
ख़ाल
का
है
मेरा
दिल
तो
मुश्किल
से
कुछ
सोलह
सतरह
साल
का
है!
Vishal Bagh
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मेरे
सय्याद
को
कोई
बुला
दे
मेरे
पिंजरे
को
तोडा
जा
रहा
है
Vishal Bagh
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