zarra-e-na-taapeeda ki khwahish-e-aftaab kya | ज़र्रा-ए-ना-तापीदा की ख़्वाहिश-ए-आफ़ताब क्या

  - Ali Jawwad Zaidi
ज़र्रा-ए-ना-तापीदाकीख़्वाहिश-ए-आफ़ताबक्या
नग़्मा-ए-ना-शुनीदाकाहौसला-ए-रबाबक्या
उम्रकादिलहैमुज़्महिलज़ीस्तहैदर्द-ए-मुस्तक़िल
ऐसेनिज़ाम-ए-दहरमेंवसवसा-ए-अज़ाबक्या
नग़्माब-लबहैंकियारियाँरक़्समेंज़र्रा-ए-तपाँ
सुनलियाकिश्त-ए-ख़ुश्कनेज़मज़मा-ए-सहाबक्या
चेहरा-ए-शबदमकउठासुर्ख़शफ़क़झलकउठी
वक़्त-ए-तुलूकहगयाजानेआफ़्ताबक्या
रिंदोंसेबाज़-पुर्सकीपीर-ए-मुग़ाँसेदिल-लगी
आजयेमोहतसिबनेभीपीहैकहींशराबक्या
शम्अथीलाखअध-जलीबज़्ममेंरौशनीतोथी
वर्नाग़म-ए-नशातमेंरौशनी-ए-गुलाबक्या
ग़ैरकीरह-गुज़रहैयेदोस्तकीरह-गुज़रनहीं
कौनउठाएगातुझेदेखरहाहैख़्वाबक्या
मुद्दतोंसेख़लिशजोथीजैसेवोकमसीहोचली
आजमिरेसवालकामिलहीगयाजवाबक्या
हाँतिरीमंज़िल-ए-मुराददूरबहुतहीदूरहै
फिरभीहरएकमोड़परदिलमेंयेइज़्तिराबक्या
  - Ali Jawwad Zaidi
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