hujoom-e-aish-o-tarab men bhi hai bashar tanhaa | हुजूम-ए-ऐश-ओ-तरब में भी है बशर तन्हा

  - Ali Jawwad Zaidi
हुजूम-ए-ऐश-ओ-तरबमेंभीहैबशरतन्हा
नफ़सनफ़सहैमुहाजिरनज़रनज़रतन्हा
येमेराअक्सहैआईनेमेंकिदुश्मनहै
उदासतिश्ना-सितमदीदा-ए-बे-ख़बरतन्हा
येक़त्ल-गाहभीहैबाल-पनकाआँगनभी
भटकरहीहैजहाँचश्म-ए-मो'तबरतन्हा
बुरामानमिरेहम-सफ़रख़ुदाकेलिए
चलूँगामैंभीइसीराहपरमगरतन्हा
जानेभीगीहैंपलकेंयेक्यूँँदम-ए-रुख़्सत
किघरमेंभीतोरहाहूँमैंउम्र-भरतन्हा
बज़्म-ए-ख़लवतियाँहैहश्र-गाह-ए-अवाम
अँधेरीरातकरूँँकिसतरहबसरतन्हा
किसीग़ज़लकाकोईशे'रगुनगुनातेचलें
तवीलराहेंवफ़ाकीहैंऔरसफ़रतन्हा
निसारकरदूँयेपलकोंपेकाँपतीयादें
तिराख़यालजोआएदम-ए-सहरतन्हा
जिधरभीजाओकोईराहरोकलेताहै
वफ़ानेछोड़ीनहींएकभीडगरतन्हा
बरतलोयारोबरतनेकीचीज़हैयेहयात
होलाखतरसीहुईतल्ख़-ए-मुख़्तसरतन्हा
उमीदकितनीहीमायूसियोंकीमशअ'लहै
होरहगुज़ारमेंजैसेकोईशजरतन्हा
जिधरसेगुज़रेथेमा'सूमहसरतोंकेजुलूस
सुनाकिआजहै'ज़ैदी'वहीडगरतन्हा
  - Ali Jawwad Zaidi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy