neend aa gaii thii manzil-e-irfaan se guzar ke | नींद आ गई थी मंज़िल-ए-इरफ़ाँ से गुज़र के

  - Ali Jawwad Zaidi
नींदगईथीमंज़िल-ए-इरफ़ाँसेगुज़रके
चौंकेहैंहमअबसरहद-ए-इसयाँसेगुज़रके
आँखोंमेंलिएजल्वा-ए-नैरंग-ए-तमाशा
आईहैख़िज़ाँजश्न-ए-बहाराँसेगुज़रके
यादोंकेजवाँक़ाफ़िलेआतेहीरहेंगे
सरमाकेइसीबर्ग-ए-पुर-अफ़्शाँसेगुज़रके
काँटोंकोभीअबबाद-ए-सबाछेड़रहीहै
फूलोंकेहसींचाकगरेबाँसेगुज़रके
वहशतकीनईराहगुज़रढूँढ़रहेहैं
हमअहल-ए-जुनूँदश्तबयाबाँसेगुज़रके
बनजाएगाताराकिसीमायूसख़लामें
येअश्क-ए-सहरगोशा-ए-दामाँसेगुज़रके
आवारगी-ए-फ़िक्रकिधरलेकेचलीहै
सर-मंज़िल-ए-आज़ादी-ए-इंसानसेगुज़रके
पाईहैनिगाहोंनेतिरीबज़्म-ए-तमन्ना
रातोंकोचिनारोंकेचराग़ाँसेगुज़रके
इकगर्दिश-ए-चश्म-ए-करमइकमौज-ए-नज़ारा
कलशबकोमिलीगर्दिश-ए-दौराँसेगुज़रके
मिलनेकोतोमिलजाएमगरलेगाभलाकौन
साहिलकासुकूँशोरिश-ए-तूफ़ाँसेगुज़रके
इकनिश्तर-ए-ग़मऔरसहीग़म-ए-मंज़िल
देखतोइकरोज़रग-ए-जाँसेगुज़रके
अबदर्दमेंवोकैफ़ियत-ए-दर्दनहींहै
आयाहूँजोउसबज़्म-ए-गुल-अफ़्शाँसेगुज़रके
  - Ali Jawwad Zaidi
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