shikwe ham apni zabaan par kabhi l | शिकवे हम अपनी ज़बाँ पर कभी लाए तो नहीं

  - Ali Jawwad Zaidi
शिकवेहमअपनीज़बाँपरकभीलाएतोनहीं
हाँमगरअश्कजबउमडेथेछुपाएतोनहीं
तेरीमहफ़िलकेभीआदाबकिदिलडरताहै
मेरीआँखोंनेदुर्र-ए-अश्कलुटाएतोनहीं
छानलीख़ाकबयाबानोंकीवीरानोंकी
फिरभीअंदाज़-ए-जुनूँअक़्लनेपाएतोनहीं
लाखपुर-वहशतपुर-हौलसहीशाम-ए-फ़िराक़
हमनेघबराकेदिएदिनसेजलाएतोनहीं
अबतोइसबातपेभीसुल्हसीकरलीहैकिवो
बुलाएसहीदिलसेभुलाएतोनहीं
हिज्रकीरातयेहरडूबतेतारेनेकहा
हमकहतेथेआएँगेवोआएतोनहीं
इंक़िलाबआतेहैंरहतेहैंजहाँमेंलेकिन
जोबनानेकाहोअहलमिटाएतोनहीं
अपनीइसशोख़ी-ए-रफ़्तारकाअंजामसोच
फ़ित्नेख़ुदउठनेलगेतूनेउठाएतोनहीं
  - Ali Jawwad Zaidi
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