ahl-e-zaahir ko fann-e-jalwa-gari ne maara | अहल-ए-ज़ाहिर को फ़न्न-ए-जल्वा-गरी ने मारा

  - Ali Jawwad Zaidi
अहल-ए-ज़ाहिरकोफ़न्न-ए-जल्वा-गरीनेमारा
अहल-ए-बातिनकोतवाना-नज़रीनेमारा
तल्ख़थीमौतमगरज़ीस्तसेशीरीं-तरथी
उससेपूछोजिसेबे-बाल-ओ-परीनेमारा
मुंदमिलहोतेहुएज़ख़्महरेहोनेलगे
साएसाएमेंतिरीहम-सफ़रीनेमारा
दश्त-ए-ग़ुर्बतकेशब-ओ-रोज़कीलज़्ज़तमिली
सरवतनमेंभीबहुतदर-ब-दरीनेमारा
इश्क़औरदस्त-ए-तलबऐसीभीक्यामजबूरी
शौक़कोकाविश-ए-दरयूज़ा-गरीनेमारा
ज़ख़्म-ए-पारीनाभराहीथाकिसोज़न-ए-हाल
औरइकतीरतिरीबख़िया-गरीनेमारा
दाद-ओ-शमशीरनेजबजबभीडरानाचाहा
क़हक़हाशौक़कीशोरीदा-सरीनेमारा
सुल्हकरनातोज़मानेसेहैआसाँलेकिन
मुझको'ज़ैदी'मिरीबालिग़-नज़रीनेमारा
  - Ali Jawwad Zaidi
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