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Ashraf Jahangeer
ye uski meherbaani hai vo ghar men hi sanwarti hai
ye uski meherbaani hai vo ghar men hi sanwarti hai | ये उसकी मेहरबानी है वो घर में ही सँवरती है
- Ashraf Jahangeer
ये
उसकी
मेहरबानी
है
वो
घर
में
ही
सँवरती
है
निकल
आए
जो
महफ़िल
में
तो
क़त्ल-ए-आम
हो
जाए
- Ashraf Jahangeer
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दर्द
की
बात
किसी
हँसती
हुई
महफ़िल
में
जैसे
कह
दे
किसी
तुर्बत
पे
लतीफ़ा
कोई
Ahmad Rahi
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तेरे
होते
हुए
महफ़िल
में
जलाते
हैं
चराग़
लोग
क्या
सादा
हैं
सूरज
को
दिखाते
हैं
चराग़
Ahmad Faraz
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पहले
थोड़ी
मुश्किल
होगी
आगे
लेकिन
मंज़िल
होगी
सब
बाराती
शायर
होंगे
मेरी
शादी
महफ़िल
होगी
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Tanoj Dadhich
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एक
महफ़िल
में
कई
महफ़िलें
होती
हैं
शरीक
जिस
को
भी
पास
से
देखोगे
अकेला
होगा
Nida Fazli
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शुमार
अपना
भी
हो
जाए
अदब
के
नाम
चीनों
में
ख़ुदा
कुछ
शे'र
कहला
दे
अगर
मुश्किल
ज़मीनों
में
मैं
फ़न्न-ए-शा'इरी
पर
इसलिए
क़ुर्बान
हूँ
रहबर
नहीं
मिलता
ये
गौहर
बादशाहों
के
ख़ज़ीनों
में
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Moid Rahbar
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बात
करनी
मुझे
मुश्किल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
जैसी
अब
है
तेरी
महफ़िल
कभी
ऐसी
तो
न
थी
Bahadur Shah Zafar
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मोहब्बत
करने
वाले
कम
न
होंगे
तिरी
महफ़िल
में
लेकिन
हम
न
होंगे
Hafeez Hoshiarpuri
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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पहले
कहता
है
जुनूँ
उसका
गिरेबान
पकड़
फिर
मेरा
दिल
मुझे
कहता
है
इधर
कान
पकड़
ऐसी
वहशत
भी
न
हो
घर
के
दरो
बाम
कहें
कोई
आवाज़
ही
ले
आ
कोई
मेहमान
पकड़
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Azbar Safeer
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ख़ुशबू
से
किस
ज़बान
में
बातें
करेंगे
लोग
महफ़िल
में
ये
सवाल
तुझे
देख
कर
हुआ
Mansoor Usmani
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चाह
थी
दो
जहाँ
की
मगर
देखिए
इक
गली
से
गुज़रता
रहा
उम्र
भर
Ashraf Jahangeer
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जहन्नुम
कर
दिया
है
ज़िन्दगी
को
तुम्हारी
ऐसी
की
तैसी
मोहब्बत
Ashraf Jahangeer
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उलझ
करके
तेरी
ज़ुल्फ़ों
में
यूँँ
आबाद
हो
जाऊँ
कि
जैसे
लखनऊ
का
मैं
अमीनाबाद
हो
जाऊँ
मैं
यमुना
की
तरह
तन्हा
निहारूँ
ताज
को
कब
तक
कोई
गंगा
मिले
तो
मैं
इलाहाबाद
हो
जाऊँ
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Ashraf Jahangeer
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जी
लिया
और
जी
नहीं
सकता
ख़ुद
को
पर,
मार
भी
नहीं
सकता
कर
दिया
खोखला
मुझे
उसने
अब
तो
मैं
डूब
ही
नहीं
सकता
ज़िंदगी
घूरने
लगी
है
मुझे
यार
मैं
और
पी
नहीं
सकता
जिस्म
छलनी
हुआ
है
अंदर
से
ज़ख़्म
ऐसे
कि
सी
नहीं
सकता
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Ashraf Jahangeer
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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