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Ashraf Jahangeer
jee liya aur jee nahin saka
jee liya aur jee nahin saka | जी लिया और जी नहीं सकता
- Ashraf Jahangeer
जी
लिया
और
जी
नहीं
सकता
ख़ुद
को
पर,
मार
भी
नहीं
सकता
कर
दिया
खोखला
मुझे
उसने
अब
तो
मैं
डूब
ही
नहीं
सकता
ज़िंदगी
घूरने
लगी
है
मुझे
यार
मैं
और
पी
नहीं
सकता
जिस्म
छलनी
हुआ
है
अंदर
से
ज़ख़्म
ऐसे
कि
सी
नहीं
सकता
- Ashraf Jahangeer
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धूप
के
एक
ही
मौसम
ने
जिन्हें
तोड़
दिया
इतने
नाज़ुक
भी
ये
रिश्ते
न
बनाये
होते
Waseem Barelvi
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उसने
गले
से
हमको
लगाया
तो
रो
पड़े
अपना
बना
के
हाथ
छुड़ाया
तो
रो
पड़े
मैंने
ग़मों
से
कह
तो
दिया
रहना
उम्र
भर
वा'दा
ग़मों
ने
अपना
निभाया
तो
रो
पड़े
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Vikas Sahaj
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ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
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मेहनत
तो
करता
हूँ
फिर
भी
घर
ख़ाली
है
बाबूजी
मिट्टी
के
कुछ
दीपक
ले
लो
दीवाली
है
बाबूजी
मिट्टी
बेच
रहा
हूँ
जिस
में
कोई
जाल
फ़रेब
नहीं
सोना
चाँदी
दूध
मिठाई
सब
जा'ली
है
बाबूजी
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Gyan Prakash Akul
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जब
से
वो
समुंदर
पार
गया
गोरी
ने
सँवरना
छोड़
दिया
Bekal Utsahi
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ये
इंतिज़ार
सहर
का
था
या
तुम्हारा
था
दिया
जलाया
भी
मैं
ने
दिया
बुझाया
भी
Aanis Moin
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इज़हार-ए-इश्क़
उस
से
न
करना
था
'शेफ़्ता'
ये
क्या
किया
कि
दोस्त
को
दुश्मन
बना
दिया
Mustafa Khan Shefta
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क्या
जाने
किस
ख़ता
की
सज़ा
दी
गई
हमें
रिश्ता
हमारा
दार
पे
लटका
दिया
गया
शादी
में
सब
पसंद
का
लाया
गया
मगर
अपनी
पसंद
का
उसे
दूल्हा
नहीं
मिला
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Afzal Ali Afzal
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कहाँ
तो
तय
था
चराग़ाँ
हर
एक
घर
के
लिए
कहाँ
चराग़
मुयस्सर
नहीं
शहर
के
लिए
Dushyant Kumar
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तिरे
बग़ैर
अजब
बज़्म-ए-दिल
का
आलम
है
चराग़
सैंकड़ों
जलते
हैं
रौशनी
कम
है
Shakeel Badayuni
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जहन्नुम
कर
दिया
है
ज़िन्दगी
को
तुम्हारी
ऐसी
की
तैसी
मोहब्बत
Ashraf Jahangeer
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चाह
थी
दो
जहाँ
की
मगर
देखिए
इक
गली
से
गुज़रता
रहा
उम्र
भर
Ashraf Jahangeer
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बंद
कमरे
में
हज़ारों
मील
अब
चलते
हैं
हम
काफ़ी
महँगी
पड़
रही
है
शा'इरी
से
दोस्ती
Ashraf Jahangeer
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उलझ
करके
तेरी
ज़ुल्फ़ों
में
यूँँ
आबाद
हो
जाऊँ
कि
जैसे
लखनऊ
का
मैं
अमीनाबाद
हो
जाऊँ
मैं
यमुना
की
तरह
तन्हा
निहारूँ
ताज
को
कब
तक
कोई
गंगा
मिले
तो
मैं
इलाहाबाद
हो
जाऊँ
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Ashraf Jahangeer
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भूलभुलैया
था
उन
ज़ुल्फ़ों
में
लेकिन
हमको
उस
में
अपनी
राहें
दिखती
थीं
आपकी
आँखों
को
देखा
तो
इल्म
हुआ
क्यूँँ
अर्जुन
को
केवल
आँखें
दिखती
थीं
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Ashraf Jahangeer
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