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Gulzar
ye shukr hai ki mire paas teraa gham to raha
ye shukr hai ki mire paas teraa gham to raha | ये शुक्र है कि मिरे पास तेरा ग़म तो रहा
- Gulzar
ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
- Gulzar
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किसी
किसी
को
नसीब
हैं
ये
उदासियाँ
भी
किसी
को
ये
भी
बता
न
पाए
उदास
लड़के
Vikas Sahaj
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वक़्त
अच्छा
भी
आएगा
'नासिर'
ग़म
न
कर
ज़िंदगी
पड़ी
है
अभी
Nasir Kazmi
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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तुम्हारे
साथ
था
तो
मैं
गम-ए-उल्फ़त
में
उलझा
था
तुम्हें
छोड़ा
तो
ये
जाना
कि
दुनिया
ख़ूब-सूरत
है
Nirbhay Nishchhal
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हम
अपने
दुख
को
गाने
लग
गए
हैं
मगर
इस
में
ज़माने
लग
गए
हैं
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Madan Mohan Danish
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जानता
हूँ
एक
ऐसे
शख़्स
को
मैं
भी
'मुनीर'
ग़म
से
पत्थर
हो
गया
लेकिन
कभी
रोया
नहीं
Muneer Niyazi
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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उसी
मक़ाम
पे
कल
मुझ
को
देख
कर
तन्हा
बहुत
उदास
हुए
फूल
बेचने
वाले
Jamal Ehsani
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ये
किस
मक़ाम
पे
लाई
है
ज़िंदगी
हम
को
हँसी
लबों
पे
है
सीने
में
ग़म
का
दफ़्तर
है
Hafeez Banarasi
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उदासी
पर
कहे
हैं
शे'र
सबने
उदासी
को
जिया
कितनों
ने
लेकिन
?
Tanoj Dadhich
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वक़्त
रहता
नहीं
कहीं
टिक
कर
आदत
इस
की
भी
आदमी
सी
है
Gulzar
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कोई
ख़ामोश
ज़ख़्म
लगती
है
ज़िंदगी
एक
नज़्म
लगती
है
बज़्म-ए-याराँ
में
रहता
हूँ
तन्हा
और
तंहाई
बज़्म
लगती
है
अपने
साए
पे
पाँव
रखता
हूँ
छाँव
छालों
को
नर्म
लगती
है
चाँद
की
नब्ज़
देखना
उठ
कर
रात
की
साँस
गर्म
लगती
है
ये
रिवायत
कि
दर्द
महके
रहें
दिल
की
देरीना
रस्म
लगती
है
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Gulzar
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मुझे
अँधेरे
में
बे-शक
बिठा
दिया
होता
मगर
चराग़
की
सूरत
जला
दिया
होता
न
रौशनी
कोई
आती
मिरे
तआ'क़ुब
में
जो
अपने-आप
को
मैं
ने
बुझा
दिया
होता
ये
दर्द
जिस्म
के
या-रब
बहुत
शदीद
लगे
मुझे
सलीब
पे
दो
पल
सुला
दिया
होता
ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
ने
तो
रुला
दिया
होता
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Gulzar
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जिस
की
आँखों
में
कटी
थीं
सदियाँ
उस
ने
सदियों
की
जुदाई
दी
है
Gulzar
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कभी
तो
चौंक
के
देखे
कोई
हमारी
तरफ़
किसी
की
आँख
में
हम
को
भी
इंतिज़ार
दिखे
Gulzar
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