hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Gulzar
mujhe andhere men be-shak bitha diya hota
mujhe andhere men be-shak bitha diya hota | मुझे अँधेरे में बे-शक बिठा दिया होता
- Gulzar
मुझे
अँधेरे
में
बे-शक
बिठा
दिया
होता
मगर
चराग़
की
सूरत
जला
दिया
होता
न
रौशनी
कोई
आती
मिरे
तआ'क़ुब
में
जो
अपने-आप
को
मैं
ने
बुझा
दिया
होता
ये
दर्द
जिस्म
के
या-रब
बहुत
शदीद
लगे
मुझे
सलीब
पे
दो
पल
सुला
दिया
होता
ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
ने
तो
रुला
दिया
होता
- Gulzar
Download Ghazal Image
क्या
दुख
है
समुंदर
को
बता
भी
नहीं
सकता
आँसू
की
तरह
आँख
तक
आ
भी
नहीं
सकता
तू
छोड़
रहा
है
तो
ख़ता
इस
में
तेरी
क्या
हर
शख़्स
मेरा
साथ
निभा
भी
नहीं
सकता
Read Full
Waseem Barelvi
Send
Download Image
42 Likes
अब
लगता
है
ठीक
कहा
था
'ग़ालिब'
ने
बढ़ते
बढ़ते
दर्द
दवा
हो
जाता
है
Madan Mohan Danish
Send
Download Image
128 Likes
कितना
भी
दर्द
पिला
दे
ख़ुदा
पी
सकता
हूँ
ज़िन्दगी
हिज्र
से
भर
दे
मिरी
जी
सकता
हूँ
हर
दफ़ा
दिल
पे
ही
खा
के
हुई
है
आदत
ये
बंद
आँखों
से
भी
हर
ज़ख़्म
को
सी
सकता
हूँ
Read Full
Faiz Ahmad
Send
Download Image
7 Likes
पास
जब
तक
वो
रहे
दर्द
थमा
रहता
है
फैलता
जाता
है
फिर
आँख
के
काजल
की
तरह
Parveen Shakir
Send
Download Image
33 Likes
यूँँ
दिल
को
तड़पने
का
कुछ
तो
है
सबब
आख़िर
या
दर्द
ने
करवट
ली
या
तुम
ने
इधर
देखा
Jigar Moradabadi
Send
Download Image
29 Likes
ज़ख़्म
दिल
पर
हज़ार
करता
है
और
कहता
है
प्यार
करता
है
दर्द
दिल
में
उतर
गया
कैसे
कोई
अपना
ही
वार
करता
है
Read Full
Santosh S Singh
Send
Download Image
29 Likes
तुम्हारे
बाद
ये
दुख
भी
तो
सहना
पड़
रहा
है
किसी
के
साथ
मजबूरी
में
रहना
पड़
रहा
है
Ali Zaryoun
Send
Download Image
130 Likes
हम
आह
भी
करते
हैं
तो
हो
जाते
हैं
बदनाम
वो
क़त्ल
भी
करते
हैं
तो
चर्चा
नहीं
होता
Akbar Allahabadi
Send
Download Image
64 Likes
बे-नाम
सा
ये
दर्द
ठहर
क्यूँँ
नहीं
जाता
जो
बीत
गया
है
वो
गुज़र
क्यूँँ
नहीं
जाता
Nida Fazli
Send
Download Image
62 Likes
हर
दुख
का
है
इलाज,
उसे
देखते
रहो
सबकुछ
भुला
के
आज
उसे
देखते
रहो
देखा
उसे
तो
दिल
ने
ये
बे-साख़्ता
कहा
छोड़ो
ये
काम
काज
उसे
देखते
रहो
Read Full
Aslam Rashid
Send
Download Image
55 Likes
Read More
ये
शुक्र
है
कि
मिरे
पास
तेरा
ग़म
तो
रहा
वगर्ना
ज़िंदगी
भर
को
रुला
दिया
होता
Gulzar
Send
Download Image
43 Likes
जिस
की
आँखों
में
कटी
थीं
सदियाँ
उस
ने
सदियों
की
जुदाई
दी
है
Gulzar
Send
Download Image
44 Likes
वो
ख़त
के
पुर्ज़े
उड़ा
रहा
था
हवाओं
का
रुख़
दिखा
रहा
था
बताऊँ
कैसे
वो
बहता
दरिया
जब
आ
रहा
था
तो
जा
रहा
था
कुछ
और
भी
हो
गया
नुमायाँ
मैं
अपना
लिक्खा
मिटा
रहा
था
धुआँ
धुआँ
हो
गई
थीं
आँखें
चराग़
को
जब
बुझा
रहा
था
मुंडेर
से
झुक
के
चाँद
कल
भी
पड़ोसियों
को
जगा
रहा
था
उसी
का
ईमाँ
बदल
गया
है
कभी
जो
मेरा
ख़ुदा
रहा
था
वो
एक
दिन
एक
अजनबी
को
मिरी
कहानी
सुना
रहा
था
वो
उम्र
कम
कर
रहा
था
मेरी
मैं
साल
अपने
बढ़ा
रहा
था
ख़ुदा
की
शायद
रज़ा
हो
इस
में
तुम्हारा
जो
फ़ैसला
रहा
था
Read Full
Gulzar
Download Image
5 Likes
शाम
से
आँख
में
नमी
सी
है
आज
फिर
आप
की
कमी
सी
है
Gulzar
Send
Download Image
49 Likes
बे-सबब
मुस्कुरा
रहा
है
चाँद
कोई
साज़िश
छुपा
रहा
है
चाँद
Gulzar
Send
Download Image
42 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Diversity Shayari
Sach Shayari
Kismat Shayari
Shadi Shayari
Rose Shayari