ik aah-e-zer-e-lab ke gunahgaar ho ga.e | इक आह-ए-ज़ेर-ए-लब के गुनहगार हो गए

  - Ali Jawwad Zaidi
इकआह-ए-ज़ेर-ए-लबकेगुनहगारहोगए
अबहमभीदाख़िल-ए-सफ़-ए-अग़्यारहोगए
जिसदर्दकोसमझतेथेहमउनकाफ़ैज़-ए-ख़ास
उसदर्दकेभीलाखख़रीदारहोगए
जिनहौसलोंसेमेराजुनूँमुतमइनथा
वोहौसलेज़मानेकेमेयारहोगए
साक़ीकेइकइशारेनेक्यासेहरकरदिया
हमभीशिकार-ए-अंदक-ओ-बिस्यारहोगए
अबउनलबोंमेंशहदशकरघुलगएतोक्या
जबहमहलाक़-ए-तल्ख़ी-ए-गुफ़्तारहोगए
हरवा'दाजैसेहर्फ़-ए-ग़लतथासराबथा
हमतोनिसार-ए-जुरअत-ए-इंकारहोगए
तेरीनज़रपयाम-ए-यक़ींदेगईमगर
कुछताज़ावसवसेभीतोबेदारहोगए
इसमय-कदेमेंउछलीहैदस्तारबार-हा
वाइज़यहाँकहाँसेनुमूदारहोगए
सरसब्ज़पत्तियोंकालहूचूसचूसकर
कितनेहीफूलरौनक़-ए-गुलज़ारहोगए
'ज़ैदी'नेताज़ाशे'रसुनाएब-रंग-ए-ख़ास
हमभीफ़िदा-ए-शोख़ी-ए-इंकारहोगए
  - Ali Jawwad Zaidi
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