manzil-e-dil mili kahaan khatm-e-safar ke baad bhi | मंज़िल-ए-दिल मिली कहाँ ख़त्म-ए-सफ़र के बाद भी

  - Ali Jawwad Zaidi
मंज़िल-ए-दिलमिलीकहाँख़त्म-ए-सफ़रकेबादभी
रहगुज़रएकऔरथीराहगुज़रकेबादभी
आजतिरेसवालपरफिरमिरेलबख़मोशहैं
ऐसीहीकशमकशथीकुछपहलीनज़रकेबादभी
दिलमेंथेलाखवसवसेजल्वा-ए-आफ़्ताबतक
रहगईथीजोतीरगीनूर-ए-सहरकेबादभी
नासेह-ए-मस्लहत-नवाज़तुझकोबताऊँक्यायेराज़
हौसला-ए-निगाहहैख़ून-ए-जिगरकेबादभी
हारकेभीनहींमिटीदिलसेख़लिशहयातकी
कितनेनिज़ाममिटगएजश्न-ए-ज़फ़रकेबादभी
कोईमिराहीआशियाँहासिल-ए-फ़स्ल-ए-गुलथा
हाँयेबहारहैबहाररक़्स-ए-शररकेबादभी
एकतुम्हारीयादनेलाखदिएजलाएहैं
आमद-ए-शबकेक़ब्लभीख़त्म-ए-सहरकेबादभी
  - Ali Jawwad Zaidi
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