go wasi'a sehra men ik haqeer zarra hooñ | गो वसीअ' सहरा में इक हक़ीर ज़र्रा हूँ

  - Ali Jawwad Zaidi
गोवसीअ'सहरामेंइकहक़ीरज़र्राहूँ
रह-रवीमेंसरसरहूँरक़्समेंबगूलाहूँ
हरसमुद्र-मंथनसेज़हरहीनिकलताहै
मैंयेज़हरजीवनकाहँसकेपीभीसकताहूँ
येभरी-पुरीधरतीइकअनंतमेलाहै
औरसारेमेलेमेंजैसेमैंअकेलाहूँ
यूँँतोफूलफबताहैहरहसीनजोड़ेपर
जिसनेचुनलियामुझकोमैंउसीकाबेलाहूँ
कलहरएकजल्वेमेंलाखजल्वेपैदाथे
मैंकिथातमाशाईआजख़ुदतमाशाहूँ
ज़िंदगीकेरस्तोंपरज़ख़्म-ख़ुर्दादीवाना
कहरहाथा'ज़ैदी'सेमैंभीआपजैसाहूँ
  - Ali Jawwad Zaidi
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