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AMAN RAJ SINHA
vo mujhko jis tarah se duaaein tha de raha
vo mujhko jis tarah se duaaein tha de raha | वो मुझको जिस तरह से दुआएँ था दे रहा
- AMAN RAJ SINHA
वो
मुझको
जिस
तरह
से
दुआएँ
था
दे
रहा
मैं
तो
समझ
गया
ये
क़यामत
की
रात
हैं
- AMAN RAJ SINHA
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हमारी
याद
आने
पर
अकेली
रात
में
तुम
भी
कभी
पंखा
कभी
टीवी
कभी
दीवार
देखोगे
Ambar
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दिन
ढल
गया
और
रात
गुज़रने
की
आस
में
सूरज
नदी
में
डूब
गया,
हम
गिलास
में
Rahat Indori
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यार
सब
जम्अ'
हुए
रात
की
ख़ामोशी
में
कोई
रो
कर
तो
कोई
बाल
बना
कर
आया
Ahmad Mushtaq
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है
किसी
जालिम
उदू
की
घात
दरवाज़े
में
है
या
मसाफ़त
है
नई
या
रात
दरवाज़े
में
है
जिस
तरहा
उठती
है
नजरें
बे-इरादा
बार-बार
साफ़
लगता
है
के
कोई
बात
दरवाजे
में
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Farhat Abbas Shah
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बिगड़
गई
थी
जो
दुनिया
सॅंवार
दी
हमने
चढ़ा
के
सर
पे
मुहब्बत
उतार
दी
हमने
अँधेरी
रात
किसी
बे-वफ़ा
की
यादों
में
बहुत
तवील
थी
लेकिन
गुज़ार
दी
हमने
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Hameed Sarwar Bahraichi
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तेरे
बिन
घड़ियाँ
गिनी
हैं
रात
दिन
नौ
बरस
ग्यारह
महीने
सात
दिन
Rehman Faris
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जिस
पर
हमारी
आँख
ने
मोती
बिछाए
रात
भर
भेजा
वही
काग़ज़
उसे
हम
ने
लिखा
कुछ
भी
नहीं
Bashir Badr
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क्या
बैठ
जाएँ
आन
के
नज़दीक
आप
के
बस
रात
काटनी
है
हमें
आग
ताप
के
कहिए
तो
आप
को
भी
पहन
कर
मैं
देख
लूँ
मा'शूक़
यूँँ
तो
हैं
ही
नहीं
मेरी
नाप
के
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Farhat Ehsaas
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रात
भर
उन
का
तसव्वुर
दिल
को
तड़पाता
रहा
एक
नक़्शा
सामने
आता
रहा
जाता
रहा
Akhtar Shirani
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ख़ैरात
में
अब
दे
दिया
जाए
इसे
हर
रात
नीदें
ज़ाया'
होती
रहती
हैं
Nishant Singh
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जो
देखते
थे
दुनिया
मेरी
आँखों
से
कभी
ऑंखें
वही
दिखा
रहे
हैं
मुझ
को
आजकल
AMAN RAJ SINHA
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मुझको
यहाँ
पहचानने
वाले
बहुत
से
हैं
मगर
मुझको
यहाँ
पर
जानने
वाला
तो
कोई
भी
नहीं
AMAN RAJ SINHA
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हम
दोनों
के
ग़म
एक
जैसे
ही
हैं
दोस्त
हम
दोनों
ही
तन्हा
बचे
इस
शहर
में
AMAN RAJ SINHA
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अब
मुझे
उस
पर
यक़ीन
इतना
रहा
है
पानी
तपती
रेत
में
जितना
रहा
है
AMAN RAJ SINHA
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तुमको
ये
लग
रहा
है
कि
दीवानगी
है
दोस्त
मेरी
ग़ज़ल
नहीं
है
मेरी
ज़िंदगी
है
दोस्त
गिर
जो
गया
नज़र
से
तू
हैरत
नहीं
मुझे
अपना
भी
तू
रहा
नहीं
शर्मिंदगी
है
दोस्त
कहता
था
जो
कभी
मुझे
बदलूँगा
मैं
नहीं
अब
तो
वो
भी
बदल
गया
हैरानगी
है
दोस्त
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AMAN RAJ SINHA
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