ऐसीतन्हाईहैअपनेसेभीघबराताहूँमैं
जलरहीहैंयादकीशमएँबुझाजाताहूँमैं
आगईआख़िरग़म-ए-दिलवोभीमंज़िलआगई
मुझकोसमझातेथेजोअबउनकोसमझाताहूँमैं
ज़िंदगीआज़ादा-रौबहर-ए-हक़ीक़तबे-कनार
मौजआतीहैतोबढ़ताहीचलाजाताहूँमैं
बज़्म-ए-फ़िक्र-ओ-होशहोयामहफ़िल-ए-ऐश-ओ-निशात
हरजगहसेचंदनश्तरचंदग़मलाताहूँमैं
ज़ेहनमेंयादोंकेगुलशनदिलमेंअज़्म-ए-जू-ए-शीर
इकनयाफ़रहादपाताहूँजिधरजाताहूँमैं
शबकेसन्नाटेमेंरहग़ैरोंकेनग़्मेंकीतरह
अहल-ए-दिलकीबस्तियोंमेंआहबनजाताहूँमैं
हिम्मत-अफ़ज़ाहैहरइकउफ़्तादराह-ए-इश्क़की
ठोकरेंखाताहूँगिरताहूँसँभलजाताहूँमैं
इश्क़अक्सरमाँगताहैनग़्मा-ए-इशरतकीभीक
अहल-ए-दुनियाकीतही-दस्तीपेशरमाताहूँमैं
शाम-ए-तन्हाईबुझादोझिलमिलातीशम्अ'भी
इनअँधेरोंहीमेंअक्सररौशनीपाताहूँमैं
आजआग़ोश-ए-तमन्नाथीशनासा-ए-विसाल
रज़्म-गाह-ए-ज़िंदगीमेंताज़ा-दमआताहूँमैं
कोईनाज़ुकहाथबाज़ूथामलेताहैमिरा
ठोकरेंखातातोहूँलेकिनसँभलजाताहूँमैं
अपनेमिटनेकाभीग़महोताहैइसएहसाससे
मैंनहींअपनामगरतेरातोकहलाताहूँमैं
हैसुहानीकिसक़दरउनदूरियोंकीचाँदनी
पूछलेताहैकोई'ज़ैदी'तोइतराताहूँमैं