zulmat-kadon men kal jo shua-e-sehar gaii | ज़ुल्मत-कदों में कल जो शुआ-ए-सहर गई

  - Ali Jawwad Zaidi
ज़ुल्मत-कदोंमेंकलजोशुआ-ए-सहरगई
तारीकी-ए-हयातयकायकउभरगई
नज़्ज़ारा-ए-जमालकीफ़ुर्सतकहाँमिली
पहलीनज़रनज़रकीहदोंसेगुज़रगई
इज़हार-ए-इल्तिफ़ातकेबादउनकीबे-रुख़ी
इकरंगऔरनक़्श-ए-तमन्नामेंभरगई
ज़ौक़-ए-जुनूँजज़्बा-ए-बेबाकक्यामिले
वीरानहोकेभीमिरीदुनियासँवरगई
अबदौर-ए-कारसाज़ी-ए-वहशतनहींरहा
अबआरज़ू-ए-लज्ज़त-ए-रक़्स-ए-शररगई
इकदाग़भीजबींपेमेरीगयातोक्या
शोख़ीतोउनकेनक़्श-ए-क़दमकीउभरगई
तारेसेझिलमिलातेहैंमिज़्गान-ए-यारपर
शायदनिगाह-ए-यासभीकुछकामकरगई
तुमनेतोइककरमहीकियाहालपूछकर
अबजोगुज़रगईमिरेदिलपरगुज़रगई
जल्वेहुएजोआमतोताब-ए-नज़रथी
पर्देपड़ेहुएथेजहाँतकनज़रगई
साराक़ुसूरउसनिगह-ए-फ़ित्ना-जूकाथा
लेकिनबलानिगाह-ए-तमन्नाकेसरगई
  - Ali Jawwad Zaidi
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